हरियाणा राजकोषीय घाटे को चौदहवें वित्त आयोग द्वारा निर्धारित जीडीपी की 3 प्रतिशत की सीमा के अंदर रखने में भी सफल रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष में ये घाटा 2.82 प्रतिशत ही रहेगा। जबकि हमारा कुल कर्जा भी पिछले तीन साल से जीएसडीपी की 25 प्रतिशत निर्धारित सीमा के अंदर रहा है। मौजूदा वित्त वर्ष में भी यह 21.26 प्रतिशत ही रहेगा। प्रदेश का राजस्व घाटा भी वर्ष 2016-17 से अब तक अपेक्षाकृत कम हुआ है। ये घाटा जीएसडीपी का 1.63 प्रतिशत से कम होकर 1.01 प्रतिशत हो गया है। जबकि बीच में यह एक साल बढ़ा भी।
इसे नफे-नुकसान के गणित में अच्छी बात यह भी रही कि प्रदेश का पूंजीगत व्यय यानी प्रदेश के विकास में खर्च होने का वाला बजट बढ़ा भी है। वर्ष 2016-17 में यह पूंजीगत व्यय जहां 16653.84 प्रतिशत था, वो वर्ष 2018-19 में 33246.11 करोड़ रहा। जबकि मौजूदा वित्त वर्ष अभी चल रहा है।
राजस्व घाटे में ही प्रदेश का प्रभावी राजस्व घाटा भी अगले 5 सालों में 0 प्रतिशत लाने का दम भरा गया है। सीएम ने सदन में कहा कि हम अपने उक्त प्रयासों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश की 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के सपने को पूरा करने में प्रभावशाली ढंग से प्रयास करेंगे। मुझे भरोसा है कि प्रदेश का ये बजट इस मार्ग को सुगम एवं प्रशस्त करेगा।