प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोहाना से विधायक सुभाष बराला को हरियाणा भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। पहली बार किसी जाट नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।
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बराला को प्रदेश अध्यक्ष बनाने में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अहम भूमिका निभाई। बराला नरेंद्र मोदी के खास है। इन्होंने ही सतलोक के संत रामपाल को सरेंडर करने के लिए मनाने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी।
इन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव जीता है। पार्टी ने बराला को अध्यक्ष बनाकर प्रदेश के जाट समुदाय को खुश करने का प्रयास भी किया है। बराला जाट हैं और पार्टी से पिछले कई वर्षों से जुड़े हैं।
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बराला इस समय प्रदेश कार्यकारिणी के महासचिव के पद पर तैनात थे, जबकि वे प्रदेश युवा मोर्चा और प्रदेश किसान मोर्चा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
संत रामपाल को सरेंडर के लिए मनाया था
बराला पहली बार जिला फतेहाबाद के टोहाना जिले से इस बार चुनाव जीते थे। मुख्यमंत्री ने विवाद के कारण पैदा हुई स्थिति पर काबू पाने के लिए बराला को ही जिम्मेवारी सौंपी थी। इस भूमिका ने उनकी अध्यक्ष पद पर दावेदारी और मजबूत कर दी। बराला ने ही संत रामपाल को सरेंडर करने के लिए राजी किया था।
मालूम हो अब तक रामबिलास शर्मा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, लेकिन शिक्षा मंत्री बनने के कारण उनका पद से हटना तय था। ऐसे में सरकार बनने के एक महीने बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सुभाष बराला के नाम पर बुधवार को अंतिम मुहर लगाई। बराला के पिता भी भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे हैं। बराला को अध्यक्ष बनाने के लिए संघ ने भी अपनी राय दी थी।
लौह संग्रहण के संयोजक बने थे बराला
बराला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भी करीबी माने जाते हैं, क्योंकि पीएम ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट पटेल की प्रतिमा के लिए बराला को हरियाणा में लौह संग्रहण का संयोजक बनाया था।
सिरसा लोकसभा क्षेत्र की नौ सीटों में से सिर्फ बराला ही ऐसे विधायक हैं जो भाजपा की टिकट से चुनाव जीते हैं। इस कारण भी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की अहम जिम्मेवारी सौंपी गई है। बराला ने टोहाना से पूर्व मंत्री परमवीर को हराया था।
कई और दावेदार भी थे मैदान में बराला के साथ साथ भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वीरकुमार यादव, पानीपत ग्रामीण के विधायक एवं पूर्व युवा मोर्चा अध्यक्ष महीपाल ढांडा के साथ-साथ कई नेता अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल थे।
पार्टी पर भी जाट अध्यक्ष बनाने का था दबाव जब से मुख्यमंत्री गैर जाट मनोहर लाल खट्टर को बनाया गया, तभी से पार्टी हाईकमान पर किसी जाट को अध्यक्ष बनाने का दबाव लगातार बन रहा है। ऐसा करके पार्टी जाट वोट बैंक को अपनी तरफ करना चाहती है।
भाजयुमो जिला सचिव से प्रदेशाध्यक्ष तक पहुंचे बराला
भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला का जीवन सादगी भरा है उन्होंने टोहाना के राजकीय इंदिरा गांधी महाविद्यालय से बीए की शिक्षा प्राप्त की। शुरू से ही आरएसएस से जुडे़ रहे हैं। बराला कॉलेज में छात्र राजनीति के दिनों में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की।
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजनीति में प्रवेश किया और उन्हीं के नेतृत्व में प्रदेश की कमान संभाली है। वह जिला युवा मोर्चा के जिला सचिव से लेकर प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचे हैं।
सुभाष बराला सबसे पहले भूना शुगर मिल के डायरेक्टर बने। उसी समय वह मिल के वाइस चेयरमैन चुने गए। इसके पश्चात वे हरियाणा शुगर फेडरेशन के डायरेक्टर बने।
मोदी थे हरियाणा के प्रभारी, तब शुरू कर राजनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब हरियाणा के प्रभारी थे तो बराला ने राजनीति में प्रवेश किया और भाजपा का दामन थामा। वर्ष 2000 में नरेंद्र मोदी जब हरियाणा के प्रभारी थे, उस समय मनोहर लाल खट्टर प्रदेश के महामंत्री थे।
तब सुभाष बराला को फतेहाबाद भाजपा युवा मोर्चा का सचिव बनाया गया था। उनकी कार्य प्रणाली और मेहनत को देखकर वर्ष करीब 2002 में उनको भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष का महत्वपूर्ण पद दिया गया।
उसके बाद उनको भाजपा किसान मोर्चा का प्रदेशाध्यक्ष बनाया गया। वह लगातार तीन बार किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष रहे। बाद में उनको भाजपा का प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया। उसके बाद वे फिर किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष बने। 2012 में उनको प्रदेश भाजपा का महामंत्री नियुक्त किया गया।
सुभाष बराला ने 2004, 2009 में भी भाजपा की टिकट पर टोहाना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन वे असफल रहे। 2014 के चुनाव में वह पहली बार विधायक चुनकर आए। सुभाष बराला के संपर्क सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैं।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव में सुभाष बराला की प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में इनकी ड्यूटी लगाई गई थी, इससे पूर्व वह स्मृति ईरानी के चुनाव क्षेत्र अमेठी में भी उनकी चुनाव की बागडोर संभाल चुके हैं।
जीवन परिचय सुभाष बराला का जन्म 5 दिसंबर 1968 को गांव ड़ा्रंगरा मे रामनाथ बराला के घर हुआ। सन् 1987 मे उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। शुरू से ही राजनीति में कदम रखा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकी के चलते उनको गुजरात में बनने वाले सरदार वल्लभ भाई पटेल की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का हरियाणा प्रभारी भी बनाया गया है।