हरियाणा विधानसभा में बजट सत्र के तीसरे दिन जाट आरक्षण आंदोलन के काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जमकर शोर-शराबा और तू-तू, मैं-मैं हुई। विपक्ष और सत्ता पक्ष के विधायक अनेक बार एक-दूसरे से उलझ गए। साथ ही इनेलो और कांग्रेस विधायकों में भी आरोप-प्रत्यारोप के दौरान तीखी बहस हुई।
दो घंटे की चर्चा के बाद सीएम मनोहर लाल के जवाब के दौरान भी विपक्ष ने हंगामा जारी रखा। सीएम को तीन बार जवाब देते-देते बीच में बैठना पड़ा। विपक्ष उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और सदन में दूसरी सिटिंग शुरू होने पर इनेलो और कांग्रेस विधायक एक-एक मिनट के लिए वॉक आउट कर गए। इससे पहले चर्चा के दौरान विस का सियासी पारा चढ़ा रहा और नेताओं ने एक-दूसरे छींटाकशी और गड़े मुर्दे उखाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जाट आरक्षण आंदोलन पर स्थगन प्रस्ताव सदन पटल पर कांग्रेस विधायक रघुवीर कादियान ने नियम-71 के तहत चर्चा के लिए रखा। स्पीकर कंवर पाल ने प्रस्ताव रखने के साथ इस पर दो घंटे के भीतर चर्चा और न्यायालय में विचाराधीन मामले न उठाने की हिदायत दी। प्रस्ताव पर 11 बजकर छह मिनट पर कादियान ने चर्चा शुरू की। उन्होंने कहा कि जाट आंदोलनकारियों के साथ अन्याय व वादाखिलाफी हुई है। अफसरों के बजाए मंत्रिमंडल के सदस्यों की समिति वार्ता केलिए गठित की जानी चाहिए।
चौटाला, कादियान और जेपी के स्थगन प्रस्ताव पर भिड़े नेता
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान विज-कैप्टन और कादियान के बीच गर्मागर्मी भी हुई। निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने कहा कि सरकार की वादाखिलाफी के कारण आंदोलन हुआ है। जब टाडा के केस वापस लिए जा सकते हैं तो आंदोलनकारियों के क्यों नहीं? इसके लिए सरकार को गृह मंत्रालय और केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को पत्र लिखना चाहिए।
इनके पास सीबीआई से केस वापसी कराने का अधिकार है। कैप्टन अभिमन्यु के घर आगजनी का केस सीबीआई को सरकार की अनुशंसा पर ही सौंपा गया है। इसलिए उसे भी वापस ले सकते हैं। सीएम से वह केंद्र को पत्र लिखने का आग्रह करते हैं। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, कांग्रेस विधायक आनंद सिंह दांगी, रघुवीर कादियान, उदयभान, रामबिलास शर्मा और कृष्ण बेदी के बीच काफी बहसबाजी का दौर चला।
चौटाला ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
चौटाला ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
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चौटाला ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
अभय चौटाला ने काम रोको प्रस्ताव के दौरान सरकार के साथ-साथ कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। इस मुद्दे पर राजनीति करने और प्रदेश का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। जिससे कांग्रेसी भी भड़क गए। सत्ता पक्ष के विधायकों व मंत्रियों के साथ भी उनकी झड़प हुई। चौटाला ने कहा कि निर्दोष लोगों को जेलों में बंद कर रखा है और हिंसक घटनाओं की एफआईआर में नामजद लोग खुले घूम रहे हैं।
सरकार गंभीर नहीं है और जानबूझकर माहौल खराब किया जा रहा है। इस पर सीएम ने अपने जवाब में कहा कि आजाद विधायक जसबीर देशवाल के घर पर हमला करने वाले सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि विधायक के खिलाफ दर्ज केस वापस लिया है। छोटू राम धर्मशाला और देवीलाल की प्रतिमा तोड़ने वालों पर भी कार्रवाई की गई है। इस पर चौटाला ने सीएम ने उन उपद्रवियों के नाम मांग लिए, जिन पर कार्रवाई की गई है। सीएम के पास ऐसी कोई सूची न होने से सरकार के लिए स्थिति थोड़ी असहज हो गई। सीएम ने चौटाला को आश्वस्त किया कि उन्हें इसका ब्योरा भेज दिया जाएगा। चौटाला ने कहा कि भाजपा सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।