वह राहुल, सोनिया का तो बचाव कर रहे हैं, लेकिन अपने पुराने विरोधियों पर सीधा वार कर रहे हैं। जिससे कांग्रेस के लिए स्थिति असहज हो रही है। पार्टी में बड़े भीतरघात की भी आशंका जताई जा रही है।
इसके अलावा एससी वोट बैंक छिटक सकता है। एससी वोट में भाजपा पहले ही सेंध लगा चुकी है। इसे कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता था, लेकिन अब स्थिति पहले जैसी नहीं रही। एससी वर्ग काफी टूट चुका है। तंवर के कांग्रेस छोड़ने से पार्टी को चुनाव में एससी बहुल सीटों पर अंदरूनी मार पड़ सकती है।
चूंकि, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष से ज्यादा पैठ दलितों में तंवर ने बनाई थी। तंवर अब पार्टी बंधनों से पूरी तरह आजाद हैं, इसलिए वह सबसे अधिक जोर हुड्डा को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने में लगाएंगे। क्योंकि, उनका मुख्य लक्ष्य ही पूर्व सीएम को सत्ता पर काबिज होने से रोकना बन चुका है। ऐसे में हुड्डा और उनकी टीम को भी नए सिरे से अपनी रणनीति बनानी होगी।