जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों से उम्मीद जताई जाती है कि वे हर नियम-कानून का पालन करें, ताकि जनता के सामने वे रोल मॉडल बन सकें, लेकिन अक्सर सांसद व विधायक नियमों की कसौटी पर खरे नहीं उतरते। कुछ न कुछ हेराफेरी कर जाते हैं। हरियाणा विधानसभा में ऐसा ही एक दिलचस्प उदाहरण देखने को मिला है।
करीब 18 ऐसे विधायक हैं, जिन्होंने अब तक अपने पैन नंबर का खुलासा नहीं किया है। नामांकन पत्र में पैन नंबर का कॉलम होता है, लेकिन विधायक इसे भरने में कतराते हैं। यह जानकर हैरानी होगी कि इनमें आठ ऐसे विधायक हैं, जिनकी संपत्ति एक करोड़ से अधिक है।
चुनाव सुधारों के लिए काम कर रही संस्था एडीआर के मुताबिक हरियाणा विधानसभा में कुल 69 विधायकों ने ही अपने पैन नंबर का खुलासा किया है। विशेषज्ञ कहते हैं कि पैन नंबर घोषित न करना सीधे तौर पर बताता है कि वे कुछ छिपाना चाहते हैं। इनकम टैक्स से बचना चाहते हैं।
पैन घोषित न करने वाले करोड़पति विधायक
नाम--------------निर्वाचन क्षेत्र---------दल---------कुल संपत्ति
शेर सिंह------------लाडवा-----------इनेलो----------आठ करोड़ से ज्यादा
अकरम खान---------जगाधरी---------बीएसपी---------सात करोड़ से ज्यादा
शिव चरण तेजपाल---फरीदाबाद-------निर्दलीय---------चार करोड़ से ज्यादा
धर्मपाल-------------लोहारू----------इनेलो----------दो करोड़ से ज्यादा
जिले राम-----------असंध-----------हजकां----------एक करोड़ से ज्यादा
बहादुर सिंह--------नांगल चौधरी------इनेलो-----------एक करोड़ से ज्यादा
नरेश शर्मा----------बादली-----------कांग्रेस-----------एक करोड़ से ज्यादा
जलेब खान----------हथीन----------निर्दलीय----------एक करोड़ रुपये
...लेकिन अब नहीं बच सकते
विधानसभा चुनाव 2014 में चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को हलफनामे के सभी कॉलम को भरना अनिवार्य किया गया है। अब नामांकन के समय फार्म में कोई कॉलम खाली छोड़ने या महज शून्य लिखने से काम नहीं चलेगा। सूचना नहीं होने का स्पष्ट कारण भी उम्मीदवारों को कॉलम में देना होगा।
इसके अलावा कोई भी सूचना उपलब्ध नहीं होने पर इसका कारण सहित शपथ पत्र उम्मीदवारों को अनिवार्य रूप से देना होगा। भूलवश कॉलम खाली छोड़ देने पर रिटर्निंग अधिकारी संबंधित उम्मीदवार को नोटिस जारी करेगा।
नोटिस का जवाब नहीं देने पर रिटर्निंग अधिकारी की ओर से संबंधित उम्मीदवार का नामांकन पत्र खारिज कर दिया जाएगा। लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीमकोर्ट के एक फैसले को आधार बनाकर चुनाव आयोग ने एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
क्या होता है पैन नंबर
पैन कार्ड यानी परमानेंट अकाउंट नंबर (पैन) या स्थायी खाता संख्या दस अंकों की एक अक्षरांकीय संख्या है, जिसे आयकर विभाग की ओर से एक लैमिनेटेड कार्ड के रूप में जारी किया जाता है।
आयकर रिटर्न, किसी भी आयकर अधिकारी के साथ सभी पत्राचार के लिए पैन लिखना अनिवार्य है। यदि आप बैंक में अपने खाते में पैसा जमा करते हैं, उसमें भी पैन नंबर देने से फायदा रहता है।
पैन नंबर देने से जमा धन आयकर विभाग की नजर में रहता है। वित्तीय प्रत्यक्ष कर के केंद्रीय बोर्ड द्वारा समय-समय पर अधिसूचित वित्तीय लेनदेन से संबंधित सभी दस्तावेजों में भी पैन लिखना अनिवार्य है।