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रिकार्डतोड़ मतदान: कई फैक्टर एक साथ

Thu, 16 Oct 2014 04:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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हरियाणा विधानसभा चुनाव में हुए रिकार्ड तोड़ मतदान में इस बार कई फैक्टर काम करेंगे। मतदान के बढ़े प्रतिशत को सभी दल अपने खाते में जोड़ कर देख रहे हैं, लेकिन हकीकत मतगणना के बाद आने वाले परिणाम बताएंगे।
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फिलहाल भाजपा इस रिकार्ड मतदान को अपने पक्ष में और इनेलो इसे सहानुभूति की लहर मान कर चल रही है। राजनीतिक विशलेषकों का मानना है कि अधिक मतदान का हमेशा सत्ताधारी दल को नुकसान होता है।

एग्जिट पोल के नतीजों पर नजर डालें तो चर्चा आम है कि गैर जाट मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। जबकि कुछ हद तक जाट मतदाताओं की सहानुभूति पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पक्ष में नजर आ रही है।
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गैर-जाट मतदाताओं का वोट भाजपा को

देसवाली और बांगर बेल्ट में कांग्रेस जाट मतदाताओं पर पूरी तरह से कब्जा नहीं कर सकी है। अहिरवाल, उत्तर हरियाणा और बांगर के गैर जाट मतदाताओं को भी विशलेषक भाजपा के खाते में मान के चल रहे हैं। हरियाणा में दलितों को लुभाने में कांग्रेस की सरकारी योजनाएं कितनी कारगर साबित हुई हैं, यह खुलासा अभी नहीं हुआ है।

फिलहाल डेरे के समर्थन ने भाजपा की ताकत बढ़ा दी है। डेरे के समर्थन का फैक्टर काम किया तो भाजपा को बहुत सी सीटों पर टानिक मिल जाएगा। हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने के बाद सिख मतदाताओं पर नजरें गड़ाए बैठी कांग्रेस को इसका कितना लाभ मिलेगा। यह स्थिति भी अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।

राज्य में 21 से अधिक सीटें सिख बाहुल्य की सीटें हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में हय मुददा गूंजता दिखाई नहीं दिया है। फिलहाल भाजपा शहरी क्षेत्रों में मिली बढ़त को अपने और इनेलो ग्रामीण क्षेत्रों में मिली बढ़त को अपने खाते में जोड़ कर देख रही है।
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