उत्तरी हरियाणा से पहली बार वर्ष-2014 में करनाल ने मनोहर लाल के रूप में पहला मुख्यमंत्री दिया। प्रदेश में पहली बार सरकार बनाने वाली भाजपा ने मनोहर लाल को करनाल से अपना प्रत्याशी घोषित किया था। करनाल से प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों का भी संबंध रहा है। उन्होंने विधानसभा और लोक सभा चुनाव करनाल से लड़ा लेकिन मुख्यमंत्री नहीं बने। छठे सीएम बनने वाले भजन लाल ने लोकसभा के 1998 के चुनाव में भाजपा के आईडी स्वामी को करनाल से हराया था और 1999 में आईडी स्वामी से ही हारे थे।
पहले सीएम भगवत दयाल शर्मा ने करनाल लोकसभा सीट से 1977 में कांग्रेस के जगदीश प्रसाद को हराया था। प्रदेश बनने के 48 वर्ष से उत्तरी और दक्षिण हरियाणा में क्षेत्रीय सीएम बनाने की मांग उठ रही थी। पंचकूला, यमुनानगर, कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत के नेता विकास में खुद को पिछड़ा बताकर उत्तरी हरियाणा से सीएम बनाने की मांग करते आए हैं।
पानी की कमी को पूरा करवाने के लिए दक्षिण हरियाणा का सीएम बनाने की मांग भी उठती रही थी। 12वीं विधानसभा बनने के साथ ही उत्तरी हरियाणा की मांग पूरी हुई। अब 13वीं विधानसभा के लिए 21 अक्टूबर को फिर मतदान होगा। जो आगे की स्थिति स्पष्ट करेगा।
राज्यसभा सांसद ने की थी शुरूआत
उत्तरी हरियाणा से मुख्यमंत्री हो, इसकी शुरूआत लंबे समय से बीरेंद्र सिंह करते रहे हैं। मौजूदा राज्यसभा सांसद बीरेंद्र सिंह को कभी ऐसा मौका नहीं मिला। वर्ष-2005 के चुनाव में मराठा विरेंद्र वर्मा मैदान में आए और उन्होंने एकता शक्ति पार्टी का गठन करके उत्तरी हरियाणा से सीएम का मुद्दा उठाकर अनदेखी दूर करने का भरोसा दिलवाया।
पूर्व मंत्री एवं कैथल के विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला भी उत्तर हरियाणा से मुख्यमंत्री बनाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। वर्ष 2014 में बहुजन समाज पार्टी में शामिल होकर पूर्व सांसद अरविंद शर्मा ने भी इस मांग को उठाया और यमुनानगर से चुनाव लड़ा।