देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के कुनबे की ‘टूट’ ने आज चौटाला परिवार के लिए सत्ता की डगर मुश्किल बना दी है। यह कुनबा वर्ष 2005 से सत्ता से बाहर है और इस चुनाव में भी सत्ता की कुर्सी चौटाला परिवार से दूर ही है। पारिवारिक विघटन के बाद न तो इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) को कुछ खास हासिल हुआ और न ही इनेलो से अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी (जजपा) सत्ता तक पहुंचने का आंकड़ा अपने दम पर जुटा पाई।
हां, इस चुनाव में जजपा ‘किंगमेकर’ के रूप में जरूर उभरकर सामने आई है। सत्ता की ललक ने ताऊ की इस कुनबे को करीब एक साल पहले अक्टूबर 2018 में तोड़कर रख दिया था। देवीलाल के पुत्र पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला ने अपनी अलग राजनीतिक पार्टी जजपा बना ली थी। चूंकि अजय अभी जेल में हैं, लिहाजा जजपा की बागडौर अजय के बडे़ बेटे पूर्व सांसद दुष्यंत चौटाला ने संभाली और अपने भाई दिग्विजय चौटाला व मां विधायक नैना चौटाला के साथ जजपा को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया।
उधर, पूर्व सांसद दुष्यंत की अपने चाचा यानी ओमप्रकाश चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला से राजनीति खट्टास बढ़ चुकी थी। अभय खुद सीएम बनने का सपना संजोए बैठे थे, तो दुष्यंत की भी कुछ ऐसी ही चाह थी। इसी चाहत ने इनेलो और जजपा की राजनीतिक राहें जुदा कर दी।