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हरियाणा विस चुनावः हार-जीत तो बाद की बात है, क्षेत्रीय दलों को नहीं मिल रहे दमदार उम्मीदवार

Wed, 02 Oct 2019 12:20 PM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
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इनेलो नेता अभय चौटाला
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विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने को तीन दिन शेष बचे हैं, लेकिन हरियाणा में क्षेत्रीय दल अभी तक प्रत्याशियों की तलाश में जुटे हुए हैं।
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हालात यह हैं कि वर्तमान राजनीतिक परिपेक्ष्य में इन क्षेत्रीय दलों को सभी 90 सीटों पर दमदार उम्मीदवार नहीं मिल पा रहे हैं। जिसके चलते चुनाव में हार-जीत तो बाद की बात है, उससे पहले सभी सीटों पर प्रतिद्वंदियों को मुकाबला देने वाले प्रत्याशियों को उतारना इन दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। हरियाणा के इस 13वें विधानसभा चुनाव में यदि देखें तो इस बार सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है।

इसी के मद्देनजर भाजपा चुनाव रण में अपने 78 योद्धा उतार चुकी है, 12 सीटों पर मंथन जारी है। कांग्रेस भी सभी सीटों पर अपना होमवर्क पूरा कर पैनल तैयार कर चुकी है। कांग्रेस के  धुरंधर भी जल्द मैदान में दिखेंगे। लेकिन इन दोनों पार्टियों के अलावा हरियाणा में अन्य क्षेत्रीय व पंजीकृत दल जो इस चुनाव में अपनी ताल ठोक रहे हैं, उन्हे भी आसानी से प्रत्याशी नहीं मिल पा रहे हैं।
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प्रत्याशी ढूंढने को अन्य दलों के भी छूट रहे पसीने
इनेलो और जजपा के अलावा प्रदेश में कुछ अन्य दल ऐसे भी हैं, जिन्हें सभी 90 विधानसभा सीटों के लिए उपयुक्त प्रत्याशी ही नहीं मिल पा रहे हैं। आम आदमी पार्टी और स्वराज इंडिया पार्टी अभी तक सिर्फ 22 प्रत्याशियों की घोषणा कर चुका है। जिनके नामों की घोषणा की गई है, उनमें अधिकतर राजनीतिक पृष्ठभूमि के नहीं है।

इसके अलावा लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी भी अभी तक 16 प्रत्याशी व बसपा अभी तक 41 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। राष्ट्रीय लोकस्वराज पार्टी और अन्य छोटे दलों का 36 बिरादरी महागठबंधन दोनों ने मिलकर अभी सिर्फ 11 ही प्रत्याशी घोषित किए हैं। इन सभी दलों के भी जिताऊ चेहरों की तलाश में पसीने छूट रहे हैं। अब देखना यह है कि नामांकन प्रक्रिया खत्म होने को शेष बचे तीन दिनों में ये दल सभी 90 सीटों पर प्रत्याशी उतार पाएंगे या नहीं।
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बिखराव के बाद प्रत्याशियों की तलाश इनेलो-जजपा के लिए चुनौती

हरियाणा का सियासी इतिहास यदि देखें तो प्रदेश में सत्ता हमेशा कांग्रेस या क्षेत्रीय दलों के पास ही रही है। लेकिन वर्ष 2014 में हरियाणा में भाजपा सरकार बनने के बाद आज सियासी समीकरण कुछ और ही हैं। प्रमुख क्षेत्रीय दल इनेलो बिखर चुका है और अन्य दल अभी तक अपनी जड़े नहीं जमा पाएं हैं। ताऊ देवीलाल का कुनबा आज दो धड़ों इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और जननायक जनता पार्टी (जजपा) में बंटकर आमने-सामने है।

इनेलो की कमान पूर्व सीएम ओपी चौटाला के हाथ है और जजपा की कमान उनके बड़े बेटे अजय चौटाला संभाले हुए हैं। पारिवारिक विघटन के बाद दोनों ही दलों का यह पहला विधानसभा चुनाव है। दोनों दलों के लिए चुनावी नतीजे कुछ भी रहें, मगर इस वक्त इन दलों को सभी 90 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा करना भारी पड़ रहा है। जजपा अभी तक  सिर्फ  22 प्रत्याशियों की ही घोषणा कर पाई है। शेष 68 सीटों पर जजपा दमदार प्रत्याशियों की तलाश कर रही है।

उधर, वर्ष 2014 की मुख्य विपक्ष दल रहा इनेलो के कुल 20 विधायकों में से (समर्थित समेत) 17 विधायक इनेलो छोड़ चुके हैं। इनेलो में आए इस सियासी भूचाल के बाद पार्टी की हालात काफी खराब है। इसी वजह से इनेलो को इस चुनाव में ऐसे प्रत्याशी ढूंढने भारी पड़ रहे हैं, जो प्रतिद्वंदियों को मुकाबला देते हुए पार्टी को सियासी संकट से उभार सके। अभी तक इनेलो ने एक भी प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। इनेलो सुप्रीमो पूर्व सीएम ओपी चौटाला का कहना है कि गांधी जयंती 02 अक्टूबर को दिल्ली-चंडीगढ़ की बजाए गांव की चौपाल में बैठकर प्रत्याशियों की घोषणा की जाएगी।

 
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