हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी रण सजने लगा है। मुख्य दलों भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों इनेलो, जजपा के उम्मीदवारों के चेहरे साफ होने का इंतजार हो रहा है। भाजपा की पहली सूची 29 सितंबर को आएगी तो कांग्रेस की पहली सूची तीस सितंबर को अपने की संभावना है। इनेलो भी नवरात्र में ही अपने उम्मीदवार घोषित करेगी। जजपा की पहली सूची आ चुकी है और बाकी चेहरों से पर्दा नवरात्र में ही उठेगा। इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा लोकसभा की तरह ही कांग्रेस दिग्गजों के गढ़ भेदने की फिराक में है।
भाजपा का थिंक टैंक कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को उनके घर में ही घेरने की रणनीति के तहत काम कर रहा है। सत्तारूढ़ दल के निशाने पर मुख्य रूप से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, एआईसीसी मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला, पूर्व सीएलपी लीडर किरण चौधरी, कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई, विधायक करण दलाल, रघुबीर कादियान, कुलदीप शर्मा, आनंद सिंह दांगी व गीता भुक्कल हैं। चूंकि, विधानसभा में सत्ता पक्ष को घेरने में यह सबसे अधिक मुखर रहते हैं। भाजपा इन्हें वर्तमान चुनाव में हर हाल में शिकस्त देने का सपना देख रही है।
जाट बहुल जिलों रोहतक, सोनीपत, झज्जर, जींद, कैथल, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद व भिवानी के कुछ हिस्से में भाजपा का नॉन जाट मतदाताओं पर खास फोकस रहेगा। सूत्रों के अनुसार भाजपा की रणनीति यह है कि जाट वोट भाजपा, कांग्रेस, इनेलो, जजपा में बंटे और नॉन जाट मतदाता एकतरफा भाजपा के साथ आएं। जिससे कि प्रदेश की सत्ता पर दोबारा काबिज हुआ जा सके। कांग्रेस, इनेलो और जजपा को उनके गढ़ों में मात देकर भाजपा एक ही तीर से तीन निशाने करना चाह रही है। जिन-जिन सीटों पर विपक्षी दलों का जनाधार है, वहां भाजपा सशक्त उम्मीदवार उतारने के साथ ही संगठनात्मक दृष्टि से भी चुनाव जीतने के लिए पूरा जोर लगाएगी।