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Haryana Chunav Result: कांटे की टक्कर में फंसे कई दिग्गज, काफी चौंकाने वाले हैं नतीजे

Fri, 25 Oct 2019 01:22 PM IST
ajay kumar यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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haryana Assembly elections - फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों के लिए मतदान जारी है। इस विधानसभा चुनाव में अनेक दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है। 15 से अधिक सीटों पर भाजपा, कांग्रेस, इनेलो, जजपा व अन्य दलों के बड़े चेहरों मैदान में हैं। हार-जीत से उनके सियासी भविष्य का भी फैसला होगा। भाजपा 75 पार के नारे के साथ दोबारा सत्ता में आने की तमन्ना रख रही थी। हालांकि परिणाम उलट आते दिख रहे हैं। आइए एक नजर डालते हैं दिग्गजों की सीटों पर...

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इनेलो के लिए यह चुनाव नाक का सवाल है। वहीं जजपा दमदार प्रदर्शन कर अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत करना चाहती है। जनता ने किस दल को सिर आंखों पर बिठाया और किसे किनारे किया, ये चुनाव परिणाम से साफ हो जाएगा। इस चुनाव में चार चेहरे मुख्यमंत्री मनोहर लाल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला सबसे अधिक चर्चित रहे।

इन पर प्रदेश के साथ पूरे देश की भी नजरें टिकी हुई हैं। इनके चाहने और जानने वाले हर जगह हैं। मनोहर लाल सीएम हैं और संघ के लंबे समय तक प्रचारक रहे हैं, इसलिए उनका चुनाव परिणाम हर कोई जानना चाहता है। हुड्डा पूर्व सीएम होने के साथ कांग्रेस के बड़े नेता हैं, उनके नतीजे को जानने की उत्सुकता भी हर किसी को है। 
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रणदीप सुरजेवाला (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
चौटाला परिवार की कमान संभाले अभय चौटाला का रिजल्ट जानने को भी हर कोई इच्छुक है, चूंकि अभय की राजनीतिक क्षेत्र में अपनी पहचान है। दुष्यंत चौटाला पूर्व सांसद हैं, ताऊ देवीलाल की चौथी पीढ़ी से होने व पांच साल सांसद रहने के कारण उनके भी अनेक चाहने वाले हैं। इसलिए उनका चुनाव नतीजा भी हर कोई जानना चाहता है। 

सीएम के मुकाबले करनाल में कांग्रेस के त्रिलोचन सिंह, हुड्डा के सामने भाजपा के सतीश नांदल, अभय के सामने भाजपा के पवन बैनीवाल और दुष्यंत के सामने बीरेंद्र चौधरी की विधायक पत्नी प्रेमलता ने चुनाव लड़ा है। सीएम बड़ी जीत की ओर बढ़ रहे हैं, हुड्डा भी अपने गढ़ में खासा मजबूत हैं, अभय और दुष्यंत कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं।

सुरेजवाला पर पूरी कांग्रेस की नजर
कैथल से कांग्रेस उम्मीदवार रणदीप सुरजेवाला एआईसीसी के मीडिया प्रभारी भी हैं। उन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है। राहुल के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद भी उनका रुतबा बरकरार है। जींद उपचुनाव में उन्हें हार झेलनी पड़ी थी। विधानसभा चुनाव में सुरजेवाला के चुनाव परिणाम पर पूरे देश के कांग्रेसियों की नजर लगी हुई है। चूंकि, एआईसीसी में उनसे हर किसी का मिलना-जुलना होता है।

वह युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला को दो बार हराने के बाद ही सुरजेवाला राजनीति का चर्चित चेहरा बने। सुरजेवाला को भाजपा के लीला राम गुर्जर से कड़ी टक्कर मिली है।

कुलदीप बिश्नोई

कुलदीप बिश्नोई(फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
पूर्व सीएम भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई किसी समय अपने आप को सीएम के दावेदार के तौर पर पेश किया करते थे। अभी उनका कद सिर्फ हिसार संसदीय क्षेत्र की राजनीति तक ही सिमट कर रह गया है। 1998 में कुलदीप बिश्नोई का राजनीति में आगाज हुआ और वह आदमपुर से विधायक चुने गए।

रामबिलास के सामने राव की चुनौती
शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव मैदान में है। 2009 में यहां से हार गए थे। कांग्रेस के राव दान सिंह ने उन्हें चुनाव में कड़ी टक्कर दी है। जजपा से राव रमेश व इनेलो से राजेंद्र शेखावत मैदान में हैं। शर्मा का राजनीतिक भविष्य इस चुनाव से जुड़ा हुआ है। इस सीट से रामबिलास पांच बार जीत चुके हैं, राव दान तीन बार जीते हैं। दोनों सातवीं बार आमने-सामने हैं।

हैट्रिक लगाने को बेताब कविता

शहरी निकाय मंत्री कविता जैन तीसरी बार सोनीपत से चुनाव लड़ रही हैं। 2014 में यहीं से दूसरी बार जीतकर मनोहर लाल सरकार में मंत्री बनी। कांग्रेस ने यहां पर सुरेंद्र पंवार को टिकट दी है। कविता इस बार हैट्रिक लगाना चाह रही हैं। सुरेंद्र ने उन्हें कड़े मुकाबले में उलझाया हुआ है।

पंवार के सामने कड़ी चुनौती
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार इसराना से फिर मैदान में हैं। वह यहां से लगातार जीतते आ रहे हैं। पिछली बार इनेलो छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। उनके मुकाबले कांग्रेस ने बलबीर बाल्मिकी को प्रत्याशी बनाया है। उन्हें कड़ी टक्कर मिल रही है।

कैप्टन को भेदना होगा चक्रव्यूह
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु फिर नारनौंद से मैदान में हैं, 2014 में वह पहली बार यहीं से जीतकर विधानसभा पहुंचे और मनोहर लाल सरकार में वित्त मंत्री का अहम ओहदा संभाला। यहां पर कांग्रेस ने बलजीत सिहाग को उतारा है। इनेलो ने युवा नेता जस्सी पेटवाड़ को प्रत्याशी बनाया है। जजपा के रामकुमार गौतम मैदान में हैं। कैप्टन को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा रहा है।

धनखड़ की कड़ी परीक्षा

कृषि मंत्री ओपी धनखड़ बादली सीट से ही चुनाव लड़े। 2014 में पहली बार यहां से जीते और सरकार में मंत्री पद पाया। कांग्रेस ने उनके मुकाबले कुलदीप वत्स और इनेलो से बादली से महावीर गुलिया को चुनाव मैदान में उतारा है। जजपा के संजय कबलाना मुकाबले को त्रिकोणीय बना चुके हैं।

किरण को शशि से मिली टक्कर
पूर्व सीएलपी लीडर किरण चौधरी अपनी परंपरागत सीट तोशाम से से चुनाव लड़ रही हैं। वह यहां से लगातार जीतती आ रही हैं। पूर्व सीएम बंसीलाल की विरासत को संभाला हुआ है। भाजपा के शशिरंजन परमार ने इस बार किरण को कड़ी टक्कर दी।

त्रिकोणीय मुकाबले में नैना
पूर्व सीएम ओपी चौटाला की बहू नैना चौटाला इस बार डबवाली के बजाए बाढड़ा से जजपा के टिकट पर मैदान में उतरी। पिछला चुनाव उन्होंने डबवाली से जीता था। इस बार सीट बदली है। उनका मुकबला पूर्व सीएम बंसीलाल के सपुत्र रणबीर महेंद्रा व भाजपा विधायक सुखबीर मांढी से है। तीनों के बीच मुकाबला है।
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सैनी दोबारा पहुंचना चाह रहे विधानसभा

haryana Assembly elections - फोटो : अमर उजाला
चंद्रमोहन चाह रहे सक्रिय राजनीति में वापसी
पूर्व डिप्टी सीएम चंद्रमोहन सक्रिय राजनीति में वापसी चाह रहे हैं। इस बार कांग्रेस से टिकट पार पंचकूला से चुनाव लड़ा। उनका मुकाबला भाजपा विधायक ज्ञानचंद गुप्ता से है। हुड्डा के पहले कार्यकाल में वह डिप्टी सीएम बने थे, उसके बाद से विधानसभा नहीं पहुंचे।

अरोड़ा के सामने सुधा की चुनौती
पूर्व परिवहन मंत्री व 15 साल इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक अरोड़ा ने कांग्रेस टिकट पर किस्मत आजमाई है। उनके लिए यह चुनाव विधानसभा में वापसी करने वाला हो सकता है। उन्हें भाजपा विधायक सुभाष सुधा से कड़ी टक्कर मिली है। कुरुक्षेत्र में मोदी की रैली होने से मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है।
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