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Haryana Assembly Election: चार सीटों पर आजाद प्रत्याशियों को सबसे ज्यादा मिला जनता का साथ

Thu, 19 Sep 2024 03:31 PM IST
निवेदिता वर्मा कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हथीन से दो निर्दलीय उम्मीदवारों में भाजपा के बागी पूर्व विधायक कहर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में कहर सिंह इनेलो से विधायक थे। भाजपा नेता कहर सिंह से नामांकन वापस लेने के लिए मान-मन्नौवल कर रहे हैं। इसी तरह नूंह सीट से 7 और नीलोखेड़ी से 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं।
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हरियाणा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के चार विधानसभा सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा है। इसमें पूंडरी सीट सात, नूंह सीट से पांच, हथीन सीट से चार और नीलोखेड़ी सीट से पांच बार निर्दलीय उम्मीदवार जीत चुके हैं। इस बार चुनाव में पूंडरी सीट से 17 निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।

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इसमें सज्जन ढुल को जजपा ने समर्थन किया हुआ है। हथीन से दो निर्दलीय उम्मीदवारों में भाजपा के बागी पूर्व विधायक कहर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। 2009 में कहर सिंह इनेलो से विधायक थे। भाजपा नेता कहर सिंह से नामांकन वापस लेने के लिए मान-मन्नौवल कर रहे हैं। इसी तरह नूंह सीट से 7 और नीलोखेड़ी से 11 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं।

पूंडरी : निर्दलीय विधायकों ने किसी भी दल का हाथ थामा तो मिली हार

2019 में निर्दलीय विधायक बने रणधीर गोलन इस बार भी निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर 1996 से 2019 तक लगातार निर्दलीय प्रत्याशी जीतते आए हैं, जबकि पहली बार 1968 में निर्दलीय उम्मीदवार ईश्वर सिंह ने कांग्रेस के तारा सिंह को हराया था। इसके बाद खुद कांग्रेस में शामिल हो गए थे। इसके बाद 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी ईश्वर सिंह को हराया था। 2000 में दो निर्दलीय प्रत्याशी तेजवीर और नरेंद्र के बीच मुकाबले में तेजवीर को जीत मिली थी। 2004 में निर्दलीय दिनेश कौशिक ने इनेलो के नरेंदर शर्मा को शिकस्त दी। अगले चुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी बनकर उतरे दिनेश कौशिक को निर्दलीय प्रत्याशी सुल्तान ने पटखनी दे दी।

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हथीन : चार बार निर्दलीयों को मिली जीत

अभी तक यहां से चार बार निर्दलीय उम्मीदवार ने जीते हैं। 1968 में पहली बार निर्दलीय हेम राज ने कांग्रेस प्रत्याशी देबी सिंह तेवतिया को हराया था। 1972 में निर्दल उम्मीदवार रामजी लाल ने कांग्रेस की तरफ से चुनाव में उतरे हेम राज को पटखनी दी थी। हथीन में 2005 में निर्दलीय प्रत्याशी हर्ष कुमार ने कांग्रेस के जालेब खान को हराया था। अगले चुनाव में जालेब खान ने निर्दलीय ताल ठोककर कांग्रेस के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे पूर्व विधायक हर्ष कुमार को हरा दिया था।

नीलोखेड़ी : निर्दलीय विधायक बने गोंदर इस बार कांग्रेस के प्रत्याशी

नीलोखेड़ी विधानसभा सीट पर अब तक निर्दलीय उम्मीदवारों ने पांच बार चुनाव जीता है। मौजूदा विधायक धर्मपाल गोंदर भी पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते थे। साढ़े चार साल भाजपा को समर्थन करने के बाद इस बार कांग्रेस से प्रत्याशी हैं। यहां से 1968 में पहली बार निर्दलीय चंदा सिंह ने कांग्रेस के राम स्वरूप गिरी को हराया था। 1982 में दोबारा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चंदा सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार शिवराम को हराया। इसके अगले दो विधानसभा चुनावों में भी जय सिंह राणा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीते थे। जय सिंह ने 1987 में लोक दल के देवी सिंह और 1991 में जनता पार्टी के ईश्वर सिंह को हराया था। 2019 में निर्दलीय धर्मपाल गोंदर ने भाजपा के भगवान दास को मामूली अंतर से हराया था।

नूंह : 2005 के चुनाव तक पांच बार निर्दलीय प्रत्याशी जीते

नूंह सीट पर एक उपचुनाव समेत कुल पांच बार स्वतंत्र उम्मीदवार को जीत मिली है। 1967 में हरियाणा के पहले चुनाव में नूंह सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी रहीम खान ने कांग्रेस के अहमद को हराया था। 1972 में दोबारा से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर रहीम खान ने कांग्रेस प्रत्याशी खुरहेद अहमद को हराया। नूंह में 10 साल बाद 1982 में निर्दलीय प्रत्याशी रहीम खान ने कांग्रेस के उम्मीदवार सरदार खान को हराया। 1989 के उपचुनाव में स्वतंत्र उम्मीदवार हसन मोहम्मद जीत गए। नूंह में आखिरी बार 2005 में निर्दलीय प्रत्याशी हबीब-उर-रहमान ने आफताब अहमद को हराया था।
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