दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हरियाणा में इमोशनल कार्ड खेलने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद हरियाणा में प्रचार को धार देंगे। मूल रूप से हरियाणा निवासी होने के नाते वोट बैंक को साधने की कोशिश करेंगे।
आबकारी नीति घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद मुख्यमंत्री का पद छोड़कर अब दिल्ली के अरविंद केजरीवाल हरियाणा के विधानसभा चुनाव पर फोकस करेंगे। रणनीति के तहत वह यहां इमोशनल कार्ड खेलेंगे।
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एक तो केजरीवाल मूलरूप से हरियाणा के रहने वाले हैं, दूसरा जेल में रहने के बाद सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद वह मतदाताओं की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश करेंगे। कांग्रेस से गठबंधन नहीं होने की सूरत में इस बार आम आदमी पार्टी हरियाणा की सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ रही है।
प्रत्याशियों को मैदान में उतारकर आप नेताओं ने प्रचार तेज कर दिया है। हालांकि, जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन नहीं होने के चलते आम आदमी पार्टी के लिए यह चुनाव इतना आसान नहीं है। लेकिन केजरीवाल के बाहर आने के बाद आप नेता और कार्यकर्ता उत्साहित हैं।
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दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद छोड़कर केजरीवाल सीधे हरियाणा का रुख करेंगे। संभावना है कि केजरीवाल की हरियाणा में 5 से 6 बड़ी रैलियां होंगी और दर्जनभर से अधिक रोड शो होंगे। इससे पहले केजरीवाल की पत्नी भी अरविंद को हरियाणा का लाडला कहकर हरियाणा के लोगों को साधने की कोशिश कर चुकी हैं।
अब खुद केजरीवाल हरियाणा के दौरे पर रहेंगे तो लोगों से भावुक अपील करेंगे। इनके अलावा, पंजाब और दिल्ली में आप की सरकार द्वारा कराए जा रहे कार्यों का भी बखान करेंगे। केजरीवाल मुख्य रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ मुफ्त बिजली-पानी को मुद्दा बनाने की कोशिश करेंगे।
केजरीवाल से एक बार फिर से दिल्ली को चौंकाया
मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का एलान कर अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर दिल्ली को चौंका दिया है। लेकिन ये पहला मौका नहीं है जब केजरीवाल ने इस तरह की सियासी सनसनी पैदा की है। इससे पहले 2013 में पहली बार दिल्ली की सत्ता हासिल करने वाले केजरीवाल ने कई चौंकाने वाले फैसले लिए हैं। पहली बार 49 दिन तक सरकार चलाकर अचानक से केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। उस वक्त मुख्यमंत्री ने इसकी वजह जनलोकपाल बिल पास न हो पाना बताया था। इसके बाद जब विधानसभा के चुनाव हुए तो केजरीवाल की पार्टी ने अकेले बहुमत हासिल किया।
जनता की अदालत में जाने का फैसला, नवंबर में चुनाव कराने की मांग
तिहाड़ जेल से दो दिन पहले जमानत पर बाहर निकले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एलान किया है कि वह दो दिन में इस्तीफा देंगे। वह दिल्ली विधान सभा भंग करने की सिफारिश नहीं करेंगे। इसकी जगह मंगलवार आम आदमी पार्टी (आप) विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा।
इसके बाद दिल्ली में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। केजरीवाल ने स्पष्ट किया है कि पार्टी में नंबर-दो व पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया इस पद की रेस से बाहर हैं। दोनों नेता चुनाव जीतने के बाद ही संवैधानिक पद पर बैठेंगे।
इससे पहले अरविंद केजरीवाल ने रविवार पार्टी दफ्तर में आप कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह दो दिन बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। जब तक जनता अपना फैसला नहीं सुनाती कि वह ईमानदार हैं, तब तक सीएम की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। केजरीवाल ने यह भी साफ किया कि मनीष सिसोदिया का भी यही फैसला है।
वह भी उपमुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का पद तभी संभालेंगे, जब जनता चुनाव में जिताकर उनको ईमानदारी का सर्टिफिकेट दे देगी। जल्द ही विधायक दल बैठक में दिल्ली के अगले मुख्यमंत्री का नाम तय किया जाएगा। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि नवंबर में महाराष्ट्र के साथ दिल्ली विधानसभा का भी चुनाव कराया जाए।