पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में निजी स्कूलों के फीस बढ़ोतरी मामले में हाईकोर्ट का रवैया सख्त हो गया है।
सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस अरुण पल्ली पर आधारित खंडपीठ ने हरियाणा सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह दुख की बात है कि मामले की जांच कर रहे एक रिटायर्ड जस्टिस को सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट से शिकायत करनी पड़ रही है।
अदालत ने हरियाणा सरकार द्वारा पेश किए गए माफीनामे पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। खंडपीठ ने कहा कि एफिडेविट दाखिल करने से कुछ नहीं होगा, अपने काम से कोर्ट को संतुष्ट करो।
हरियाणा सरकार की तरफ से शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव सुरीना राजन की ओर से हलफनामा पेश किया गया, जिसमें सरकार ने हाईकोर्ट से माफी मांगी है। शिक्षा विभाग की तरफ से कहा गया कि कमेटी के सदस्यों को सारी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी गई हैं।
हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 अप्रैल के लिए निर्धारित की है।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट का रुख बेहद कड़ा रहा। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारों को इन विषयों पर गंभीरता बरतनी चाहिए, क्योंकि यह मामले सीधे सीधे जनता से जुड़े हुए हैं।
प्रधान सचिव ने हाईकोर्ट में पेश किए हलफनामे में कहा कि मूलभूत सुविधा देने के बाद सरकार ने 25 फरवरी को एक सेक्शन अधिकारी, दो डाटा ऑपरेटर और दो चपरासी उपलब्ध करवा दिए हैं।
सनद रहे कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने फीस निर्धारण पर दोनों राज्यों और यूटी में कमेटियां गठित की हैं। पंजाब के स्कूलों के फीस निर्धारण की जांच रिटायर्ड जस्टिस रणजीत सिंह, चंडीगढ़ में रिटायर्ड जस्टिस आरएस मोंगिया और हरियाणा में जस्टिस किरण आनंद लाल को यह जिम्मेवारी सौंपी गई है।
विधानसभा को भेजा है प्रस्ताव: पंजाब सरकार
पंजाब सरकार की शिक्षा विभाग की प्रधान सचिव अंजलि भावरा ने कहा कि पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनऐडिड स्कूल इंस्टीट्यूशन बिल विधानसभा के पास कार्यवाही के लिए भेज दिया है। इस बिल को 7 मार्च को विधानसभा के बिजनेस आवर्स में लाया गया है। अगले सेशन में इसे फिर से इंट्रोडयूस किया जाएगा।