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स्पेशल रिपोर्ट: हरियाणा के 46 फीसदी बच्चों के पेट में कीड़े, रोक रहे ग्रोथ

Mon, 05 Feb 2018 09:39 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सूबे में तेजी से हुआ मिट्टी प्रेषित कृमि रोग का फैलाव - फोटो : File Photo
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हरियाणा में 46 फीसदी बच्चों के पेट में कीड़े हैं, जो उनकी ग्रोथ को रोक रहे हैं। इससे बच्चों में एनीमिया की शिकायत भी बढ़ने लगती है और अपेक्षाकृत कमजोरी भी रहती है। 1 साल के बच्चों से लेकर 19 साल तक के किशोरों मे इस मिट्टी प्रेषित कृमि रोग की जद में हैं।
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हरियाणा समेत अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बच्चे भी इस रोग से पीड़ित है। यह खुलासा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत करवाई गई एसटीएच (मृदा संक्रमित हेलमन्थ्स) मैपिंग में हुआ है। इस रिपोर्ट के बाद गंभीर हुए केंद्रीय स्वास्थ्य महकमे ने इस बीमारी पर देश व्यापी नियंत्रण के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल को नोडल एजेंसी नियुक्त किया है। ये एजेंसी हरियाणा की स्थिति को लेकर भी गंभीर है। इसलिए अब हरियाणा में भी स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग इस रोग पर नियंत्रण के लिए अपनी सेकेंड इनिंग शुरू करेगी।

द्वितीय शनिवार की छुट्टी रद्द, स्कूलों में दी जाएगी दवा
इस बीमारी को खत्म करने के लिए स्कूलों में 10 फरवरी को स्कूलों में नेशनल डी-वार्मिंग डे के तहत बच्चों को स्कूलों में ही एलबेंडाजोल की गोली चबाने के लिए दी जाएगी। चूंकि इस दिन द्वितीय शनिवार है और स्कूलों में छुट्टी रहती है। लेकिन इस शनिवार को इस छुट्टी को भी रद्द करने के आदेश भी विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने जारी कर दिए हैं।
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10 फरवरी द्वितीय शनिवार को स्कूल खुले रहेंगे, ताकि सभी बच्चे इस बीमारी की दवा लें और इसकी जगह 17 फरवरी को तृतीय शनिवार के दिन छुट्टी कर दी जाएगी। इसके अलावा 10 फरवरी को जो बच्चे दवा लेने से छूट जाएंगे, उन्हें 15 फरवरी को भी दवा दी जाएगी। सभी सरकारी, निजी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पीएचसी व सीएचसी में ये दवा निशुल्क खिलाई जाएगी।
 
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ये है राज्यों में इस रोग के फैलाव की स्थिति

सूबे में तेजी से हुआ मिट्टी प्रेषित कृमि रोग का फैलाव
ये है राज्यों में इस रोग के फैलाव की स्थिति
रिपोर्ट पर यदि नजर डालें तो देश के विभिन्न राज्यों में पिछले कुछ समय के दौरान बच्चों में इस बीमारी का काफी फैलाव हुआ है। हरियाणा में इस बीमारी का 46 फीसदी, पंजाब में 39, हिमाचल में 29, उत्तराखंड में 68, अंडमान एवं निकोबार में 24, दिल्ली में 28, आंध्रप्रदेश में 36, पुड्डुचेरी में 26, दादर एवं नागर हवेली में 64, दमन में 56, ओडिसा में 38, लक्षदीप में 64, गोवा में 42, महाराष्ट्र में 29, केरल में 47, झारखंड में 43, गुजरात में 31 फीसदी,  कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, वेस्ट बंगाल, बिहार, त्रिपुरा में 20 से 50 फीसदी, मध्यप्रदेश में 12.5 फीसदी, तमिलनाडु, आसाम, जम्मू एवं कश्मीर, छत्तीसगढ़, मिजोरम, नागालैंड, सिक्कम, तेलांगाना उतरप्रदेश व उतराखंड में 50 फीसदी से अधिक फैलाव दर्ज किया है।

बीमारी से बचाव को इन बातों पर गौर करें
बच्चों में डायरियां, भार का कम रहना, अकसर उल्टी आना इत्यादि इस बीमारी के लक्ष्य है। इसके लिए जरूरी है नाखून साफ व छोटे रखें, हमेशा साफ पानी पीएं, खाने को ढककर रखें, फल-सब्जियां अच्छे से धोकर खाएं, खाने से पहले हाथ अच्छे से धोएं, खुल में शौच को तौबा करें, बाहर जाते समय जूते पहने, नंगे पांव घर पर भी न रहें व आसपास सफाई रखें।
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