लखनऊ-चंडीगढ़ सद्भावना एक्सप्रेस में टीटीई काली कमाई में जुटे हैं। आरोप है कि ट्रेन में बेटिकट और वेटिंग वाले यात्रियों से टीटीई नियम तोड़कर मनमाना पैसे वसूलते हैं।
वह उन्हें सीट पर बिठा देते हैं। हद तो तब हो जाती है, जब पहले से रिजर्वेशन करा चुके यात्रियों को सीट नहीं मिलती और टीटीई उन्हें मैनेज करने का आश्वासन देता है। कुछ इसी तरह का वाकया 2 नवंबर को चंडीगढ़ लौट रहे दो दंपति के साथ पेश आया। टीटीई के इस रवैये के खिलाफ यात्रियों में रोष है।
2 नवंबर की रात सद्भावना में लखनऊ से बैठे अमर, राजू ने सामूहिक शिकायत देकर टीटीई के खिलाफ 3 नवंबर को स्टेशन मास्टर को शिकायत दी थी। लेकिन रेलव ने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि रेलवे ही टीटीई के जरिये इस तरह की वसूली करा रहा है।
इस तरह चल रहा खेल
यात्रियों का आरोप है कि 2 नवंबर को रात साढ़े दस बजे जैसे वही वह सद्भावना एक्सप्रेस में लखनऊ स्टेशन से चले तो कुछ बेटिकट और वेटिंग यात्रियों से रुपये लेकर टीटीई ने एस-1 कोच में सीट पर बिठने को कहा। इस कोच में सीट नंबर 43 जो चित्ररेखा के नाम से अलॉट थी और 46 नंबर सीट मोहिनी के नाम पर अलॉट थी।
इस पर 6 से 7 युवक जबरन आकर बैठ गए। उन्होंने कहा कि उनके पास कोई टिकट नहीं है, लेकिन उन्हें टीटीई ने बैठने को कहा है। पीड़ित यात्रियों ने जब टीटी से शिकायत की तो टीटी ने मैनेज करने को कहा। इन यात्रियों को चंडीगढ़ तक आना था। लांग रूट के चलते पूरी रात इन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।
यात्रियों ने आरोप लगाया है कि जिन यात्रियों की टिकट रिजर्व थी, टीटीई ने उन्हीं के टिकट चेक किए। जिन्हें टीटीई ने जबरन बिठाया था उनके टिकट जांच के लिए नहीं मांगे। यही कारण है कि यात्री रुपये लेकर सीट अलॉट करने के आरोप लगा रहे हैं। उस टीटीई ने अपनी पहचान भी छुपाई और यात्रियों को नाम भी नहीं बताया।