आस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीयों के अभिभावकों को उनसे मिलने के लिए अब परेशान नहीं होना पड़ेगा। अब उन्हें वीजा के लिए बार-बार आवेदन की जरूरत नहीं होगी। आस्ट्रेलिया ने भारतीयों के लिए तीन वर्षीय मल्टीपल एंट्री वीजा सिस्टम शुरू किया है। यह जानकारी सोमवार को आस्ट्रेलिया की उच्चायुक्त भारतीय मूल की हरिंदर सिद्धू ने दी।
उन्होंने यहां प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि भारतीय अभिभावकों को आस्ट्रेलिया में रह रहे अपने बच्चों के साथ वहां (आस्ट्रेलिया में) समय बिताने के लिए बार-बार वीजा के लिए आवेदन करना पड़ता था, लेकिन अब उन्होंने नया सिस्टम शुरू किया है। इससे उनकी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।
पढ़ाई के लिए आस्ट्रेलिया जाने वाले भारतीय विद्यार्थियों को स्टूडेंट वीजा के मामले में हो रही परेशानियों को सिद्धू ने स्वीकार किया। कहा कि स्टूडेंट वीजा पर आस्ट्रेलिया जाने वालों के लिए नियमों में थोड़ी सख्ती की गई है, क्योंकि इसमें कई अराजक तत्व भी शिक्षा ग्रहण करने के नाम पर आस्ट्रेलिया पहुंच रहे थे। हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि इस सख्ती से वास्तविक विद्यार्थियों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आएगी।
सिद्धू के अभिभावक मूल रूप से पंजाब के हैं, लेकिन उनका जन्म सिंगापुर में हुआ। उसके बाद उनका परिवार आस्ट्रेलिया शिफ्ट हो गया। उच्चायुक्त ने कहा कि भारत के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए आस्ट्रेलिया तैयार है। उन्होंने डेयरी, खेल, वैज्ञानिक अनुसंधान, शिक्षा और कई क्षेत्रों में सहयोग की पेशकश की।
सिद्धू ने कहा कि पिछले साल भारत के साथ उन्होंने 200 लाख आस्ट्रेलियाई डालर का कारोबार किया था। भारत नौवां सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर होने के साथ-साथ पांचवां सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट भी है। भारत के साथ आर्थिक रिश्ते बढ़ाने की अभी काफी संभावनाएं हैं।
आस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने कहा कि डेयरी के क्षेत्र में उनका देश भारत को काफी मदद कर सकता है। भारत में एक गाय औसतन साल भर में 1500 लीटर दूध देती हैं, लेकिन उनके देश में एक गाय की क्षमता करीब 5,500 लीटर दूध देने की है। भारत में गायों की ब्रीड बढ़ाने में आस्ट्रेलिया काफी मदद कर सकता है।