गुरु के लंगर में ऑपरेशन के लिए मरीजों से पैसे नहीं लिए जाते। यहां तक कैश काउंटर तक नहीं बनाया गया है। मरीज आता है और पर्ची कटाते ही उसका इलाज शुरू हो जाता है। मुख्य सेवादार सब्बरवाल के मुताबिक अभी तो पेशेंट बाहर से नहीं आ रहे हैं। बाहर से आने वाले पेशेंट यदि बस या ट्रेन का टिकट दिखाते हैं तो उन्हें आने-जाने का खर्च भी दिया जाता है।
ऑपरेशन के दौरान रुकने का भी इंतजाम संस्था की ओर से कराया जाता है। रेटिना के ऑपरेशन में पीजीआई में करीब 50-60 हजार रुपये का खर्च आता है, जबकि यहां पर एक भी रुपया नहीं लिया जाता। दावा किया गया कि रेटिना के ऑपरेशन में पीजीआई जो मशीन का इस्तेमाल करता है, वही मशीन गुरु के लंगर में इस्तेमाल की जाती है। एक मशीन की कीमत करीब एक करोड़ रुपये है। गुरु के लंगर में दो मशीने हैं, जो दानियों ने दान की है।
लॉकडाउन में अस्पताल बंद रहा तो दस लाख लोगों को खिलाया लंगर
मुख्य सेवादार सब्बरवाल के मुताबिक लॉकडाउन शुरू होने से करीब डेढ़ से दो महीने अस्पताल बंद रहा। मगर इस दौरान भी सेवादार अपने काम में जुटे रहे। करीब दस लाख लोगों को लंगर खिलाया। कालोनियों में एक लाख सेनेटेरी पैड बांटे। पीपीई किट, मास्क व सैनिटाइजर का कोई हिसाब नहीं। कोरोना संकट के दौरान मेडिकल कॉलेज में एसी बंद कर दिए गए थे। वहां पंखों की आवश्यकता पड़ी तो 100 से ज्यादा पंखे भी दिए गए।