मूर्तियों को नया रूप देते गुरमीत गोल्डी
- फोटो : अमर उजाला
कलाकार कभी रुकता नहीं, चाहे रास्ते में कितनी भी रूकावट क्या न आ जाए। कला से जुड़े शहर के कलाकारों ने अपने जज्बे से यह दिखा दिया। इनमें से एक कलाकार हैं गुरमीत गोल्डी। उन्होेंने 50 मूर्तियों को अपनी मेहनत से दोबारा ठीक कर नया जीवन दे डाला।
उन्होंने दिखा दिया कि लॉकडाउन में चाहे उन्हें घर बैठने पर मजबूर कर दिया हो, लेकिन हौसले पस्त नहीं हुए हैं। शहर की वरिष्ठ कलाकार और मूर्तिकार गुरमीत गोल्डी को मूर्ति बनाने के साथ साथ स्कल्पचर बनाने में भी महारत हासिल है।
उन्होंने बताया कि मार्च के महीने में जब कोरोना के चलते लॉकडाउन लगाया गया तो अन्य लोगों की तरह वह भी घर पर ही रहीं। जुलाई में जब कुछ समय के लिए राहत दी गई तो उन्होंने कलाग्राम में जाना शुरू किया। वहां पर काफी पुराने समय की 50 लकड़ियों की मूर्तियां पड़ी हुई थी, जिनमें कुछ की हालत काफी खस्ता हो चुकी थी। इन मूर्तियों की परतें तक उखड़ चुकी थी। गुरमीत गोल्डी ने ने साकार रूप दे दिया।
घर में बनाया स्टूडियो
गुरमीत गोल्डी ने बताया कि अभी बाहर कोई काम शुरू नहीं हो सकता हैं। उन्होंने अपने घर पर ही स्टूडियो बना दिया है। वह अपने रूटीन के काम से फ्री होकर स्टूडियो में काम पर लग जाती हैं। इस समय वह मार्बल के स्कल्पचर पर काम रही हैं। इनका काम लगभग पूरा होने वाला है।
दो बार मिल चुका है अवार्ड
गुरमीत गोल्डी मूर्तिकार और कलाकार के अलावा सेक्टर- 23 स्थित सरकारी स्कूल में फाइन आर्ट्स की टीचर हैं। वर्ष 1986 से आर्ट कॉलेज से पास आउट हुईं और इसके बाद कला का सफर शुरू किया। कड़ी मेहनत से मूर्ति बनाने के साथ साथ स्कल्पचर बनाने में महारत हासिल कर ली।
इनके द्वारा बनाए गए स्कल्पचर पंजाब यूनिवर्सिटी के म्यूजियम, श्रीनगर में डल लेक के सामने, गुजरात और शहर में लगे हुए हैं। आर्ट के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए गुरमीत गोल्डी को ललित कला अकादमी की ओर से दो बार अवार्ड भी मिल चुका है।