लंबे समय तक सिख आतंकवाद की आग में जलने वाले पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के करीब 20 साल बाद एक बार फिर सूबा बड़े आतंकवादी हमले से दहल उठा है।
सोमवार तड़के तीन आतंकियों ने राज्य के गुरदासपुर जिले के दीनानगर में एक के एक कई हमले किए जिसमें एक एसपी और होमगार्ड के तीन जवान शहीद हो गए जबकि तीन आम नागरिकों की मौत हो गई। इसके अलावा 15 लोग घायल हुए हैं।
करीब 12 घंटे तक चली मुठभेड़ में तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया। वहीं पठानकोट-अमृतसर रेल ट्रैक पर पांच बम मिले, जिन्हें समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया।
गौरतलब है कि 31 अगस्त, 1995 को तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह की कार को खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने निशाना बनाया था। इस हमले में सीएम सहित 15 लोगों की मौत हो गई थी।
तीन साल पहले भी घुसे थे आतंकवादी
बमियाल का बार्डर काफी संवेदनशील है। दीनानगर से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बमियाल बार्डर पर ही तीन साल पहले घुसपैठ कर आतंकवादी पठानकोट में घुसे थे और पहाड़ियों में जाकर छिप गए थे। उस दौरान भी दो पुलिस मुलाजिमों की मौत हो गई थी।
दरअसल बमियाल, नरोट, फतेहाबाद, तारागढ़, गालड़ी, झब्करा मराड़ा इलाके पाकिस्तान बार्डर से सटे हुए हैं। इलाके से रावी दरिया निकलता है। इस वजह से कंटीली तार का लगना नामुमकिन है।
इसी का इस्तेमाल कर आतंकवादी आसानी से पंजाब में घुस आ सकते हैं। जानकारों की माने तो यह इलाका आतंकवादियों के लिए काफी सुरक्षित है, क्योंकि बारिश के दिनों में पानी अधिक होने लगता है और सुरक्षा कम हो जाती है।
पाकिस्तान के थे सभी आतंकी
आईबी के मुताबिक मारे गए सभी आतंकी पाकिस्तान के नरोवाल के रहने वाले थे। पंजाब के काउंटर-इंटेलिजेंस आईजी ने बताया कि ये सभी लश्कर-ए-ताइबा और जैश-ए-मोहम्मद आतंकी संगठनों से संबंधित थे।
हैंड ग्रेनेड, एके-47 मिले
मारे गए आतंकी आधुनिक हथियारों से लैस थे। उनके पास से चीन निर्मित हैंड ग्रेनेड, तीन एके-47 और जीपीएस सिस्टम बरामद किए गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुए आतंकी
अमृतसर से मिली जानकारी के अनुसार तीन आतंकवादी सुबह कार से कत्थूनंगल टोल प्लाजा के पास से गुजरे थे। इन्होंने सेना की वर्दी पहन रखी थी। कार की फुटेज कत्थूनंगल पर बने टोल प्लाजा के सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने अपने कब्जे में ले लिया है।
एक को जिंदा पकड़ने की थी कोशिश
सोमवार सुबह ऑपरेशन शुरू होते ही उच्च स्तर पर यह फैसला किया गया कि कम से कम एक आतंकी को जिंदा पकड़ा जाए। ताकि पाक समर्थित आतंकवाद का ताजा और ठोस सबूत मिले। यही वजह है कि सेना के अति प्रशिक्षित पैरा ट्रूपर्स और एनएसजी की पूरी मौजूदगी के बाद भी उन्हें कार्रवाई में नहीं शामिल किया गया।
पूरी कार्रवाई को पंजाब पुलिस की स्वात टीम और एसएसजी ने अंजाम दिया। ये टीमें अपनी व्यवसायिक प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती हैं। सेना और एनएसजी को स्टैंड बाई पर रखा गया था। सूत्रों के मुताबिक सेना और एनएसजी अपनी ट्रेनिंग के मुताबिक आक्रामक रवैया अख्तियार कर आतंकियों को कम से कम समय में मार गिरातीं।
पंजाब पुलिस ने मोर्चा इसलिए भी संभाला ताकि वह अपने फोर्स की काबिलियत पर सवाल खड़े करते हुए इलाके में किसी दूसरी एजेंसी को शामिल नहीं करना चाहती थी। उच्चस्तर पर फैसला लिया गया कि पंजाब पुलिस ही पूरे ऑपरेशन को संभालेगी और आतंकी को जिंदा पकड़ने की कोशिश करेगी।
पहचान छिपाने की हर संभव कोशिश की
तीनों आतंकियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए हर तरह की रणनीति बनाई थी। उन्होंने अपने कपड़ों के साथ अंडरगार्मेंट्स पर से भी टैग हटा दिए थे। उनके किसी भी कपड़े पर कोई टैग नहीं है। उनके पास पैकेट बंद कोई खाद्य सामग्री भी नहीं थी। उनके पास से बरामद दो जीपीएस सिस्टम से ही केवल यह पता लगाया जा सकता है कि उन्होंने गुरदासपुर पहुंचने से पहले कहां से अपना सफर शुरू किया।
बुलेट प्रूफ गाड़ी के अभाव में देरी से ऑपरेशन
गुरदासपुर के दीनानगर में कहर बरपा रहे आतंकियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने में पंजाब पुलिस को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिले की पुलिस के पास बुलेटप्रूफ गाड़ी नहीं थी जिससे कि जवान आतंकियों की गोलियों से बचते हुए कार्रवाई कर सकें। पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर से बुलेट प्रूफ गाड़ी आने के बाद निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया जा सका।
निशाने पर थी अमृतसर दीनानगर पैसेंजर ट्रेन
आतंकियों ने अमृतसर-दीनानगर के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन को उड़ाने के लिए पठानकोट-अमृतसर और जम्मूतवी-दीनानगर रेल सेक्शन के बीच पड़ते पुल से गुजरने वाली ट्रैक पर पांच बम फिट किए थे। ट्रेन गुजरने से पहले चेकिंग कर रहे ट्रैक मैन को रेल पटरी पर फिट किए गए बम दिख गए।
ट्रैक पर बम होने की खबर मिलते ही उक्त सेक्शन के बीच चलने वाली सात ट्रेनें रद्द कर दी गई और तीन ट्रेनों को निर्धारित स्टेशन से पहले रोक दिया गया। यह जानकारी रेल डिवीजन फिरोजपुर के डीआरएम अनुज प्रकाश ने दी।
डीआरएम ने बताया कि सोमवार सुबह लगभग साढ़े छह बजे अश्वनी कुमार रेल पटरी की चेकिंग कर रहा था। वह जैसे ही पुल नंबर- 236, किलोमीटर 84/5-7 के पास पहुंचा तो रेलवे ट्रैक पर फिट किए हुए पांच बम दिखे। उसने तुरंत इस बात की सूचना रेल अधिकारियों को दी।
डीआरएम ने बताया कि बम की सूचना मिलते ही उक्त सेक्शन से गुजरने वाली सभी ट्रेनों को रोक दिया गया। ट्रैक से बम हटवाने के लिए पुलिस और सेना को सूचित किया गया। बम डिफ्यूज करने वाली टीम ने बमों को डिफ्यूज किया।
अमृतसर था आतंकियों का निशाना
सूत्रों के अनुसार आतंकवादी जिस तरह से बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी के साथ आए थे, उससे हो सकता है कि उनका मेन निशाना अमृतसर था। उन्हें कत्थूनंगल के पास देखा गया जो अमृतसर से महज 20 किलोमीटर दूर है। सोमवार को अमृतसर के सभी तीर्थ-स्थलों की भी सुरक्षा बढ़ा दी गई।
भुल्लर की सुरक्षा बढ़ी
आतंकी हमले के बाद दविंदरपाल सिंह भुल्लर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। उनकी सुरक्षा में तैनात इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने कहा कि भुल्लर की सुरक्षा के लिए कमिश्नर जतिंदर सिंह औलख को चिट्ठी लिखकर ओर पुलिस मुलाजिमों की तैनाती की मांग रखी गई थी। जिस पर कमिश्नर ने अमल करते हुए भुल्लर की सुरक्षा घेरा बढ़ा दिया है।