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'मौत' के बीच साढ़े 11 घंटे गुजारने वाले होमगार्ड की आपबीती

Tue, 28 Jul 2015 09:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दीनानगर (गुरदासपुर)
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मुझे कुछ याद नहीं है, कैसे मैंने मौत के बीच गुजारे। एक-एक गोली की आवाज उठती तो कलेजा कांप उठता था। भगवान को याद करता। फिर सोचता कि अगर मौत आनी है तो आनी ही है, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी।
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मेरी जान में जान तो तब आई, जब पंजाब पुलिस के अधिकारी सर्च कर वापस जाने लगे तो मैं भांग की झाड़ियों से उठ खड़ा हुआ और कहा कि मैं मुलाजिम हूं। लेकिन लोगों ने मुझे आतंकी समझ लिया और मारपीट शुरू कर दी।

यह कहना था होम गार्ड जय चंद का, जिसने क्रॉस फायरिंग में 11.30 घंटे तक भांग की झाड़ियों में लेटकर अपनी जान बचाई।
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जयचंद की आपबीती उसी की जुबानी

45 साल का जय चंद नाइट ड्यूटी पर तैनात था। उसका कहना है कि हम चारों जवान सुबह थाने पहुंचे थे और अभी आराम कर रहे थे कि तीन बंदूकधारी उनके कमरे में घुस आए। उन्होंने गोलियां चलानी शुरू कर दीं, मैं समझ गया कि ये आतंकी हैं। मैंने तत्काल खिड़की से छलांग लगा दी। पीछे से आवाज आई इनको पकड़ो, लेकिन मैं कूद चुका था।

मैं वर्दी में था और कहीं मेरी खाकी मेरी जान की दुश्मन न बन जाए, इसलिए भांग में ऐसे लेट गया जैसे कोई डेड बाडी होती है। दोनों तरफ से ग्रेनेड फेंके जा रहे थे, अगर मैं खड़ा होता तो पंजाब पुलिस के जवानों ने छलनी कर देना था, अगर बच जाता तो आतंकवादियों का शिकार बन जाना था। कई बार घर और बच्चों की याद आई।

यह सोचकर दिल दहल रहा था कि मुझे कुछ हो गया तो उनका लालन पालन कैसे होगा ? 4.45 पर जब जयचंद बाहर निकला तो पब्लिक आतंकी समझ उस पर टूट पड़ी, लेकिन अधिकारियों ने स्थिति को काबू में किया। लोगों में जबरदस्त गुस्सा था, भारत माता की जय के नारे अधिकारियों का हौसला बढ़ा रहे थे।
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