पीलीये में मामा पिस्तौल दे ग्या था
प्रीतम पूनिया के लिखे और सपना चौधरी पर फिल्माए, किसने सिखाई बदमाशी करनी, पीलिये में मामा पिस्तौल दे गया था, गाने को प्रदेश में खूब पसंद किया गया है। आजकल डीके शर्मा द्वारा लिखा और विनोद सोरखी के गाए गीत, मैं जिस दिन जमानत पर बाहर आऊंगा, पिस्तौल से महंगा तेरा लहंगा लाऊंगा, खूब ट्रेंड हो रहा है।
गायक मासूम शर्मा और रूचिका जांगड़ा के गीत के बोल हैं, टेडी बीयर का शौक नहीं राखदी, जाटणी ने गिफ्ट में गन दे दे न। प्रदीप बूरा व पूजा हुड्डा का गाना है, बता किसकी फिल्डिंग लानी है, तेरा यार जमानत पर आया। हर्ष संधु, प्रांजल दहिया के गीत के बोल हैं, एके 47 धरे संदूकां पे, लिख के बैरी लिखकर घूमें सें मेरा नाम बंदूखा पे। इसी प्रकार, सपना चौधरी का गाना है सूटर ते बन गया तेरा यार माफिया, तन्न गिफ्ट में दूंगा 12 बोर की। मासूम शर्मा का गाना है कि तू क्यूकर बनगा दो नंबरी, तन्न ढूंढे पुलिस आले। ऐसे दर्जनों गाने सोशल मीडिया पर चल रहे हैं।
हरियाणा पुलिस सतर्क, खुफिया विभाग सक्रिय
हरियाणा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गन कल्चर को लेकर पुलिस पहले से ही सतर्क है। गानों पर हर्ष फायरिंग बंद है, ऐसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर हथियारों की नुमाइश करने या बंदूक आदि के साथ फोटो डालने वालों के लाइसेंस तक रद्द किए जा रहे हैं। वहीं, ऐसे लोगों पर सोशल मीडिया के माध्यम से नजर बनाए हुए हैं। वहीं, खुफिया विभाग लगातार सक्रिय है और हर गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
उठी निगरानी आयोग बनाने की मांग
गीतों में बढ़ती अपराध संस्कृति को देखते हुए अब गीतों पर निगरानी के लिए आयोग गठन की मांग उठने लगी है। करनाल निवासी बॉलीवुड कलाकार संजीव लखनपाल का कहना है कि गीतों में गन कल्चर कतई सही नहीं है। इनकी निगरानी के लिए आयोग का गठन होना चाहिए। गीत या फिर कला ऐसी होनी चाहिए, जिससे समाज में अच्छा संदेश जाए। वहीं, मनोचिकित्सक डॉ. विवेक गर्ग का कहना है कि गीतों में बदमाशों को हीरो की तरह पेश किया जाता है, जिसका बच्चों की मनोदशा पर सीधा असर पड़ता है।