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रिपोर्टः गुजरात निरंतर बढ़ रहा विकास के पथ पर, ये मॉडल बना वजह

Mon, 21 Nov 2016 02:31 PM IST
सुधीर राघव/अमर उजाला, चंडीगढ़
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गुजरात में एक गांव में बना स्कूल
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गुजरात निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर हैं। इसके पीछे एक खास वजह है, जिसे पूरा करने में ग्राम समितियों ने काफी योगदान दिया है। जल प्रबंधन ही नहीं, गुजरात का ग्राम्य विकास मॉडल भी पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के लिए अनुकरणीय है। इसे नए गुजरात की नब्ज कहा जा सकता है।
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ग्रामीण सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं हैं वे आपसी सहयोग से बुनियादी ढांचे की दिक्कतों को दूर करने में यकीन रखते हैं। देश में श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन ने किसानों को स्वावलंबन का जो पाठ पढ़ाया, उसने सिर्फ देश में दूध की धारा ही नहीं बहाई, बल्कि ग्रामीणों के आर्थिक और सामाजिक जीवन में भी क्रांति की।

पीआईबी चंडीगढ़ की ओर से गुजरात गए पत्रकारों के दल को इस क्रांति को नजदीक से जानने का मौका मिला। आणंद में इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट के प्रजेंटेशन ने इस मॉडल को समझने में मदद की। मैनेजमेंट के छात्र ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी समस्याओं का अध्ययन करते हैं और हल तलाशते हैं। इसी आधार पर छात्रों का मूल्यांकन भी होता है।
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ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से विकास की परंपरा को दिशा दी

गुजरात के गांव में एटीएम
पाटन जिले के कणि गांव में ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से विकास की परंपरा को दिशा दी है। कणि अनुपम प्राइमरी स्कूल की इमारत शानदार है। इसमें कंप्यूटर लैब, शौचालय, भोजनालय और पानी के लिए आरओ प्लांट है।

पंचायत सदस्य नाथा लाल ने बताया कि यह सब ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से अपने बच्चों के लिए किया है। बच्चों को अच्छा भोजन और स्वच्छ वातावरण मिले, यही हमारा उद्देश्य है।

इतना ही नहीं पूरे गांव के पेयजल के लिए अलग आरओ प्लांट लगाया भी गया है, जहां से ग्रामीण दो रुपये में बीस लीटर पानी ले सकते हैं। आने वाले समय में अमूल पंजाब में अपना और विस्तार कर सकता है।

अभी बरेटा में अमूल का प्लांट है, इससे आसपास के किसानों को लाभ मिला है। अमूल के चीफ ऑपरेटिंग अफसर किशोर झाला से जब पूछा गया कि इससे वेरका के साथ कंपटीशन बढ़ेगा और दो सहकारी संस्थाओं में कंपटीशन क्या अच्छा है।

उन्होंने कहा कि यह दुग्ध उत्पादक किसानों के लिए अच्छा है। हमारा उद्देश्य है कि किसानों को उचित मूल्य मिले। वेरका हमारे लिए भातृसंस्थान है और हम मिलकर ऐसा कंपटीशन बनाएंगे कि निजी क्षेत्र भी दुग्ध किसानों को बेहतर मूल्य दे।

 
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ये कहना है कि अधिकारी का

गुजरात के गांव
ग्रामीण विकास में सबसे बड़ी बाधा इन्फ्रास्ट्रक्चर है। आप सभी गांवों को अच्छी सड़कें दे दो।  बिजली और पानी दे दो। किसान की पहुंच मंडियों तक हो जाएगी। वह खुद तय करने लगेगा कि उसे कहां उचित मूल्य मिलेगा और फसल किसे बेचनी है। सड़कें होंगीं तो स्वस्थ्य सेवा, शिक्षा, तकनीक तक भी किसान की पहुंच हो ही जाएगी। देश के काफी हिस्सों में किसान अपना माल खुद ग्राहक तक नहीं ले जा पाता। बड़ा मुनाफा बिचौलियों को मिल रहा है।
- डॉ. आरसी नटराजन, डायरेक्टर, इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट, आणंद
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