जीएसटी ने आम आदमी की लाइफ स्टाइल भी बदल डाली है। मसलन जो पच्चीस हजार रुपये कमा रहा है उसके लिए अब खर्च 27 हजार रुपये तक हो चुका है। खर्च में पेट्रोल, डीजल और घरेलू सामान सभी कुछ आ गया है। हां, आने वाले समय में जरूर आम आदमी को राहत मिल सकेगी।
रिवर्स चार्ज
जीएसटी में समान्यता सप्लायर कंज्यूमर से चार्ज करता है और सरकार को जमा करवाता है। कुछ परिस्थितियों में जीएसटी की जिम्मेदारी सप्लायर पर न होकर वस्तु या सेवा लेने वाले व्यक्ति पर होती हैं। इसे ही रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म कहते हैं। रिवर्स चार्ज में क्रेता टैक्स का भुगतान विक्त्रस्ेता को न करके सीधा सरकार को जमा करवाता है। कुछ परिस्थितियों में आंशिक रिवर्स चार्ज भी होता है जिसमें कुछ भाग की जिम्मेदारी क्रेता और कुछ की विक्रेता पर होती है।
एचएसएन कोड
जीएसटी में हर प्रोडक्ट के लिए एचएसएन कोड निर्धारित है। इस कोड का मतलब है ‘हार्मोनाईस्ड सिस्टम ऑफ़ नॉमेनक्लेचर’। जीएसटी व्यवस्था के तहत बेची जा रही हर वस्तु के सही वर्गीकरण और उन पर लागू होने वाली टैक्स की दर को निश्चित करने के लिए यह कोड बनाए गए हैं। यह कोड 2 अंक, 4 अंक, 6 अंक और 8 अंक के हो सकते हैं। बेची जाने वाली हर वस्तु का एक अलग कोड तय किया गया है। हर वस्तु पर टैक्स की दर अलग है इसी वजह से टैक्स रेट के विवाद से बचने के लिए विभिन्न वस्तुओं के दो हजार कोड बनाए गए हैं।