जीएसटी परिषद की 47वीं बैठक में कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी बोम्मई की अध्यक्षता वाले समूह ने 5,000 रुपये प्रतिदिन से ज्यादा चार्ज वाले हॉस्पिटल रूम के किराये पर पांच फीसदी जीएसटी लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। बैठक में राज्यों के वित्त मंत्रियों की तरफ से सौंपी गई रिपोर्ट पर जीएसटी परिषद विचार करेगी। इसमें दो लाख रुपये तक के सोने और कीमती पत्थरों की राज्य के भीतर आवाजाही के लिए ई-वे बिल अनिवार्य करने पर विचार किया जा रहा है।
सालाना 20 करोड़ से अधिक का कारोबार करने वाले भी इसमें शामिल किए जाएंगे। मंत्रियों के समूह ने पोस्टकार्ड और 10 ग्राम वजन तक के लिफाफे को छोड़ डाकघर की सभी सेवाओं पर कर लगाने का प्रस्ताव दिया है। परिषद की 47वीं बैठक मंगलवार से चंडीगढ़ में शुरू हुई है जो बुधवार को खत्म होगी। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में यह बैठक हो रही है। इस दौरान मंत्री समूह ने कई सेवाओं पर जीएसटी छूट को वापस लेने का भी सुझाव दिया है। इसमें प्रतिदिन 1,000 रुपये से कम के होटल आवास शामिल हैं।
डिब्बा बंद दही, पनीर, शहद पर अब पांच फीसदी लगेगा जीएसटी
अब दही, पनीर, शहद, मांस और मछली जैसे डिब्बा बंद व लेबल-युक्त खाद्य पदार्थों पर पांच फीसदी जीएसटी लगेगा। मंगलवार को जीएसटी परिषद ने राज्यों के वित्त मंत्रियों के समूह की ज्यादातर सिफारिशों को स्वीकार लिया है। परिषद ने बैठक के पहले दिन जीएसटी से छूट की समीक्षा को लेकर मंत्री समूह (जीओएम) की कई सिफारिशों को स्वीकार कर लिया। इससे डिब्बा बंद मांस (फ्रोजन छोड़कर), मछली, दही, पनीर, शहद, सूखा मखाना, सोयाबीन, मटर जैसे उत्पाद, गेहूं और अन्य अनाज, गेहूं का आटा, मूरी, गुड़, सभी वस्तुएं और जैविक खाद जैसे उत्पादों पर अब पांच प्रतिशत जीएसटी लगेगा।
अभी ब्रांडेड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर 5 फीसदी जीएसटी लगता है। बिना पैक और बिना लेबल वाले पदार्थ जीएसटी से बाहर हैं। बैठक में चेक जारी करने के एवज में बैंकों की तरफ से लिये जाने पर शुल्क पर भी 18 प्रतिशत और एटलस सहित मानचित्र और चार्ट पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। वहीं खुले में बिकने वाले बिना ब्रांड वाले उत्पादों पर जीएसटी छूट जारी रहेगी। इसके अलावा 1,000 रुपये प्रतिदिन से कम किराये वाले होटल कमरों पर 12 प्रतिशत की दर से कर लगाने की बात कही गई है। अभी फिलहाल इस पर कोई कर नहीं लगता।
जीएसटी परिषद ने खाद्य तेल, कोयला, एलईडी लैंप, ‘प्रिंटिंग/ड्राइंग इंक’, तैयार चमड़ा और सौर बिजली हीटर समेत कई उत्पादों पर शुल्क ढांचे (कच्चे माल और मध्यवर्ती वस्तुओं के मुकाबले तैयार उत्पादों पर अधिक कर) में सुधार की भी सिफारिश की है।
राज्यों ने की दो-पांच साल तक जीएसटी मुआवजा जारी रखने की मांग
जीएसटी की व्यवस्था एक जुलाई 2017 को लागू हुई थी। उस समय केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू होने के चलते राज्यों के राजस्व में आई कमी की भरपाई करने का वादा किया था। इसे जीएसटी मुआवजा कहा जाता है। 30 जून को इसकी अवधि खत्म होने जा रही है। राज्यों का कहना है कि अगर मुआवजा की व्यवस्था खत्म हो जाएगी तो उन्हें काफी ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि कोरोना महामारी की वजह से पहले उनकी वित्तीय स्थिति पर काफी दबाव बढ़ा है। इसलिए मंगलवार को कई राज्यों ने मुआवजे की व्यवस्था को दो से पांच साल तक जारी रखने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा पहले दिन काउंसिल ने जीएसटी की दरों को तर्कसंगत बनाने के लिए गठित ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की अंतरिम रिपोर्ट को मंजूरी दे दी।