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हरियाणा में ग्रुप-डी की नौकरी पाने के लिए बनाए गए फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र, सच ऐसे आया सामने

Sat, 27 Jul 2019 12:55 PM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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हरियाणा में दिव्यांग कोटे से ग्रुप-डी की नौकरी पाने के लिए फर्जीवाड़ा हुआ है। कई युवाओं ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाकर ग्रुप-डी की नौकरी पाई है। जींद उपचुनाव से पहले सरकार ने प्रदेश में ग्रुप-डी के 18218 पद भरे थे। जिनमें से अधिकांश चयनित अभ्यर्थियों ने नौकरी भी ज्वाइन कर ली है। राज्य सरकार को ग्रुप-डी की भर्ती में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर दिव्यांग कोटे की नौकरियों में हुए फर्जीवाड़े की शिकायतें मिली हैं। 
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शिकायत मिलने के बाद सरकार ने बीते अप्रैल महीने में ही दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की जांच कराने के निर्देश सभी विभागों को दे दिए थे, लेकिन कोई अमल ही नहीं हुआ। अब मुख्य सचिव कार्यालय ने हरकत में आते हुए सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड, निगमों व सरकारी उपक्रमों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों, मंडलायुक्तों और डीसी को वीरवार शाम सख्त लहजे में निर्देश जारी करते हुए 15 दिन में जांच पूरी करने की डेडलाइन तय कर दी है।

निर्देशों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। विभागों को मेडिकल रि-एग्जामिनेशन के लिए कैंप लगाना होगा। जांच में जिनके दिव्यांगता प्रमाण पत्र गलत पाए जाएंगे, उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा। मुख्य सचिव के निर्देश में साफ है कि फर्जी प्रमाण पत्र पाए जाने पर नियुक्तियां रद्द कर दी जाएं।
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सीएमओ कर रहे प्रमाण पत्र की पुनः जांच में आनाकानी, सरकार सख्त

प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद कई सरकारी अस्पतालों के सीएमओ दिव्यांगता प्रमाण पत्र की दोबारा जांच करने में आनाकानी कर रहे हैं। जिसकी शिकायत भी विभागों ने सरकार से की है। शिकायत के बाद मुख्य सचिव कार्यालय ने निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा को पत्र लिखकर कड़े निर्देश दिए हैं। उनमें कहा गया है कि सभी सीएमओ दोबारा से नौकरी पा चुके व्यक्तियों के दिव्यांगता स्तर को जांचें और सही प्रमाण पत्र जारी करें। जांच में आनाकानी करने वाले सीएमओ पर स्वास्थ्य विभाग कड़ी कार्रवाई करे।

चार श्रेणियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर संदेह
दिव्यांग कोटे के तहत नौकरी पाने केलिए चार श्रेणियों में बनाए गए दिव्यांगता प्रमाण पत्रों पर सवाल उठे हैं। सरकार के दिशा-निर्देशों पर ये खरा नहीं उतरते। विभागों को संदेह है कि प्रमाण पत्र फर्जी हैं, इसलिए दोबारा से जांच हो। जिन श्रेणियों के दिव्यांगता प्रमाण पत्र पर उंगली उठी हैं, उनमें विजुअली हैंडीकैप्ड (वीएच), ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड (ओएच), बोन मिनरल डेंसिटी हैंडीकैप्ड (बीएमडी) और हियरिंग हैंडीकैप्ड(एचएच) श्रेणियां शामिल हैं।
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