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पहली बार आंदोलन में महिलाओं की जबर्दस्त भागीदारी, सर्दी में सड़क पर डटे रहने का एलान

Sun, 20 Dec 2020 02:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अंकित चौहान, सोनीपत

सार

  • पंजाब के अलावा हरियाणा, यूपी, दिल्ली, राजस्थान से पहुंच रही हैं महिलाएं
  • किसान आंदोलन में पहले महिलाओं की नहीं दिखती थी ज्यादा भागीदारी, कृषि कानूनों की खिलाफत करने को आगे बढ़ रहीं
  • महिलाओं ने कहा, कृषि कानूनों को जब तक रद्द नहीं किया जाएगा, सर्दी में ऐसे ही आंदोलन में सड़क पर रहेगी
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महिलाओं की भागीदारी... - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कृषि कानूनों को रद्द कराने के लिए चल रहे किसानों के आंदोलन में पुराने आंदोलनों से काफी कुछ अलग हो रहा है। ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी किसान आंदोलन में महिलाओं की इतनी ज्यादा भागीदारी हो रही है और वह इतना लंबा चल रहे आंदोलन में लगातार धरने पर डटी हुई हैं।

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जहां पहले केवल पंजाब की महिलाएं आंदोलन में शामिल थीं, वहीं अब हरियाणा, यूपी, दिल्ली, राजस्थान तक की महिलाएं आंदोलन में शामिल हो रही हैं। वह धरनास्थल पर बैठती हैं तो खाना बनाने से लेकर अन्य काम भी करती हैं। महिलाएं साफ कहती हैं कि कृषि कानूनों को जब तक रद्द नहीं किया जाएगा, वह इस तरह ही सर्दी में सड़क पर रहेंगी।

कृषि कानूनों के विरोध में नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर 23 दिनों से आंदोलन चल रहा है। जहां शुरुआत में आंदोलन में पंजाब की चंद महिलाएं ही शामिल थीं और जब धरना शुरू हुआ तो वहां से धीरे-धीरे महिलाएं आने लगीं। अब केवल पंजाब से महिलाएं वहां नहीं पहुंच रही हैं, बल्कि उसके साथ ही हरियाणा, दिल्ली, यूपी, राजस्थान समेत अन्य राज्यों से महिलाएं पहुंच रही हैं।
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यही कारण है कि आंदोलन में अब महिलाएं काफी ज्यादा हो गई है और वह इस आंदोलन में आगे बढ़कर हिस्सा ले रही है। किसान नेता खुद भी यह मानते हैं कि पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी किसान आंदोलन में महिलाएं इस तरह हिस्सा लेने के लिए आगे आई हैं। पहले भी कई बड़े किसान आंदोलन हुए है, लेकिन अधिकतर आंदोलन में केवल पुरुष किसान ही हिस्सा लेते थे।

सरकार ने जिस तरह से कृषि कानून बनाए है, उससे किसान की जमीन ही नहीं बचेगी। हमारे पास परिवार चलाने के लिए जमीन ही एक जरिया है, क्योंकि खेती करके ही परिवार का गुजारा होता है। जब जमीन ही नहीं रहेगी तो खेती कैसे होगी और परिवार कैसे चलेगा। इसलिए हम भी आंदोलन में शामिल होने आई है और जब तक सरकार यह कानून रद्द नहीं करती है, तब तक हमारा आंदोलन ऐसे ही जारी रहेगा। हम किसी भी तरह से पीछे नहीं है और आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है तो यहां खाना बनाने से लेकर अधिकतर काम में मदद करती है।
- गुरप्रीत, जालंधर

हम यहां दो दिन पहले आए हैं और जब तक आंदोलन चलेगा, तभी तक यहां रहेंगे। हम शांति से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से हम मांग करते है कि कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। क्योंकि कृषि कानूनों से किसानों को कोई फायदा नहीं है। किसान नहीं चाहते हैं कि यह कृषि कानून रहे तो सरकार को इसे रद्द कर देना चाहिए। किसान मजबूरी में सड़क पर बैठे हैं और कानून रद्द हो जाएंगे तो सभी खुशी से अपने घर चले जाएंगे।
- जसबीर कौर, दिल्ली

सरकार ने जिन कृषि कानूनों को बनाया है, उनको रद्द कराने के लिए हम यहां आई है। यहां हम केवल पंजाब से नहीं आई है, बल्कि हरियाणा, यूपी, राजस्थान, दिल्ली सभी जगहों से हमारी बहनें आई हुई हैं। हम अपनी खेती बचाने के लिए यहां आई है और हमारे परिवार भी यहां आए है। पहले ही खेती से केवल परिवार का गुजारा होता है तो काफी जरूरतों को कम करना पड़ता है। अब इन कृषि कानूनों के कारण परिवार भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।
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- सतिंदर दीप कौर, पंजाब

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