18.5 केएलडी का एसटीपी बना रहा पंजाब
वर्ष 2009 के बाद कांसल में बड़े स्तर पर निर्माण हुआ है। सीवरेज का पानी चंडीगढ़ के जंगल में जाने लगा। प्रशासन ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई तो अब जंगल को बचाने के लिए पंजाब के कांसल क्षेत्र में 18.5 केएलडी क्षमता का एक आधुनिक एसटीपी बनाया जा रहा है, जिसकी समय सीमा फरवरी 2026 तय की गई है। इसका उद्देश्य है कि भविष्य में सीवरेज पानी जंगल तक न पहुंचे।
लगाए जाएंगे आम, जामुन, नीम, पीपल, बांस के पौधे
डेढ़ से 2 साल में जंगल को दोबारा से हरा भरा करने की कोशिश है। वहां पर आम, जामुन, नीम, पीपल, बांस आदि के कई पेड़ लगाए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने योजना बनाई कि जैसे ही मिट्टी भरने का काम पूरा हो जाएगा वहां पर 7 से 8 फीट के पौधे लगाए जाएंगे, जो विभाग ने पहले ही तैयार कर लिए हैं। इसके अलावा आने वाले दिनों में जब बारिश होगी तो पंजाब का पानी दोबारा इस जंगल में न आए इसके लिए भी व्यवस्था की जा रही है।
मरे पेड़ भी कर सकते हैं वापसीः आईएफएस सौरभ कुमार
पर्यावरण विभाग के निदेशक आईएफएस सौरभ कुमार ने बताया कि पेड़ों में अद्भुत क्षमता होती है। यदि उन्हें सही मिट्टी, नमी और पोषण मिले तो वे दोबारा हरे-भरे हो सकते हैं। इसी उद्देश्य से वहां की मिट्टी को पोषक बनाया जा रहा है और पुराने पेड़ों की जड़ों को संजीवनी देने की कोशिश हो रही है। विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले तीन वर्षों में जंगल अपने पुराने स्वरूप में लौट आए। इस दिशा में बीते कई महीनों से युद्धस्तर पर काम हो रहा है। आने वाले मानसून में पौधों को प्राकृतिक सिंचाई भी मिलेगी, जिससे पुनरुद्धार की प्रक्रिया और तेज होगी।