संगरूर जिले की 53 साल की जरनैल कौर ने मानवता की नई मिसाल पेश की है। पोलियो ग्रस्त व्हील चेयर पर जीवन गुजा रही महिला ने अपनी पोती को किडनी दान देकर नया जीवन दिया है।
महिला एवं पोती धीरे-धीरे रिकवर कर रही हैं। जिससे घर में खुशी का माहौल है। अब वह अपनी पोती का सदा खुश देखना चाहती है।
महिला के ऑपरेशन का सारा काम फोर्टिस अस्पताल में हुआ। वीरवार को फोर्टिस में प्रेस कांफ्रेंस में महिला ने बताया कि पिछले वर्ष मेरी 19 वर्षीय पोती रुपिंदर पीएमटी की तैयारी कर रही थी।
अगले दिन ही पीएमटी परीक्षा थी, लेकिन रात को उसकी पोती को दिखना बंद हो गया। जैसे ही घर वालों को इस पता चला। परिवार के सारे मेंबर मोहाली पहुंच गए।
ऐसे लग रहा था मानो परिवार पर आफत टूट पड़ी हो। बेटी की बीमारी बिल्कुल समझ नहीं आ रही थी। इसके बाद रूपिंदर कौर को फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया।
फोर्टिस के डॉक्टरों ने सारे टेस्ट किए तो पता चला कि किडनी खराब हो गई है। नई किडनी लगानी थी, परंतु आए कहां से। रूपिंदर कौर के माता-पिता दोनों बीपी के मरीज थे। ऐसे में वे किडनी दे नहीं सकते थे। लेकिन बेटी का जीवन जरूरी थी।
इसी बीच मैंने अपनी किडनी देने का फैसला लिया। लेकिन जब अस्पताल लाया गया, तो डॉक्टरों ने इसे पेचीदा केस बताया। परंतु अस्पतालों के डॉक्टरों ने मेरी हिम्मत कम नहीं होने दी। उन्होंने मेरा ऑपरेशन किया। साथ ही पोती को किडनी देकर नया जीवन दिया।
इस मौके पर रूपिंदर ने बताया कि पहले तो वह डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन वह पेपर तो दे नहीं पाई। ऐसे में अब उन्होंने बीएससी बायोटेक की पढ़ाई शुरू की है।
इसके लिए खालसा कॉलेज संगरूर में दाखिला लिया है। इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले डॉ. प्रियदर्शी रंजन ने बताया कि दादी पोलियो से पीड़ित थी। ऐसे में सर्जरी पेचीदा थी। लेकिन लैप्रोस्कोपी तकनीक से ऑपरेशन को आसानी से किया जा सका।
उन्होंने बताया किडनी दान देने वाले लोग भी सामान्य व्यक्ति की तरह जिंदगी जीते हैं। उन्होंने दादी के प्रयास की प्रशंसा की। साथ ही अन्य लोगों को भी सबक लेने की नसीहत दी।