कैप्टन ने कहा कि पाकिस्तान की आईएसआई के समर्थन से 2014 में सिख रेफरेंडम-2020 की साजिश शुरू की गई थी। एसएफजे की गैर कानूनी गतिविधियों ने देश को बड़ी चुनौती दी है। हाल के वर्षों के दौरान एसएफजे ने पंजाब में आगजनी और हिंसा की गतिविधियां करवाने के लिए कुछ गरीब और भोले भाले नौजवानों को फंड मुहैया कराया था।
इस संगठन ने पंजाब में गैंगस्टरों पर और गरमख्यालियों का समर्थन प्राप्त करने की अनेक कोशिशें की और उन्हें भारत सरकार से पंजाब की आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित किया। सीएम ने कहा, भारत को अस्थिर करने के लिए एसएफजे को जो भी देश अपनी जमीन देगा, उसे भी इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे।
विश्व कप मैच के दौरान फहराया खालिस्तान का झंडा
एसएफजे भारत से बाहर भी लगातार मजबूती हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसका खुलासा 30 जून, 2019 की घटना से हुआ है, जब इंग्लैंड में सक्रिय एसएफजे के कार्यकर्ताओं ने एजबेस्टन (बर्मिंघम) में भारत और इंग्लैंड के बीच विश्व कप क्रिकेट मैच के मौके पर भारत विरोधी प्रदर्शन किया।
इस मौके पर पम्मा और उसके जोड़ीदार को रेफरेंडम-2020 की टी-शर्ट पहने देखा गया और यह क्रिकेट मैच के दौरान खालिस्तान का झंडा फहरा रहे थे। बीते सप्ताह एसएफजे ने सोशल मीडिया पर एक पोस्टर भी अपलोड किया जो पूरी तरह अलगाववाद को हवा दे रहा था।
उसमें खालिस्तान समर्थक सिखों को 9 जुलाई, 2019 को न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मैच के दौरान भारतीय टीम का विरोध करने की अपील की गई थी।
अकाली दल पर कैप्टन ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने इस मामले में शिरोमणणि अकाली दल और उसके नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि अकाली दल के प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने अपने बयान में कहा कि खालिस्तान का कोई मुद्दा नहीं है।
कैप्टन ने इस मुद्दे की गंभीरता का जिक्र करते हुए अकालियों से कहा कि इस मुद्दे पर घटिया राजनीति से दूर रहें और इस समस्या से लड़ने और इसे खत्म करने के लिए सरकार का साथ दें। उन्होंने कहा कि अकाली दल जानबूझ कर एसएफजे के एजेंडे को हवा दे रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें पंजाब और इसके लोगों के हितों का कोई ख्याल नहीं है।
एसएफजे ने की पंजाब पुलिस में बगावत कराने की कोशिश
मुख्यमंत्री का कहना है कि एसएफजे ने प्रदेश सरकार के विरुद्ध पंजाब पुलिस के कर्मचारियों को बगावत करने के लिए उकसाने की कोशिश की थी। इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री, जेल मंत्री, पूर्व व मौजूदा डीजीपी समेत पंजाब के सीनियर पुलिस अधिकारियों को भयभीत करने के लिए धमकियां भी दी गईं।
इस संगठन ने सोशल मीडिया पर चलाई अपनी मुहिम के तहत सिख फौजियों को अपना निशाना बनाया और उन्हें फौज छोड़ने व रेफरेंडम-2020 के लिए काम करने के लिए उकसाया था।
खालिस्तान समर्थक सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से दुनिया भर के सिख युवाओं को भारत के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रही है।
यह रेफरेंडम-2020 के माध्यम से देश-विदेश में बैठे सिखों से यह जानना चाहती है कि अलग पंजाब के बारे में वे क्या सोचते हैं? एसएफजे कई वर्षों से इसके जरिये अलग सिख राज्य की मांग को हवा दे रही है।
यह अमेरिका में बैठे एसएफजे के संस्थापक एडवोकेट गुरपतवंत सिंह के दिमाग की उपज है। भारतीय एजेंसियों को शक है कि आईएसआई इन अलगाववादी गुटों की मदद से पंजाब में फिर से आतंकवाद को जिंदा करने की फिराक में है।
पाकिस्तान में अब भी कई खालिस्तानी समर्थित आतंकी गुट मौजूद हैं और आईएसआई सिख फॉर जस्टिस की मदद से सिख युवकों का ब्रेनवाश कर भारत के खिलाफ आतंकी हमलों के लिए इस्तेमाल करना चाहती है।
एसजेएफ ने पिछले साल अगस्त माह में ‘लंदन डिक्लरेशन ऑन पंजाब इंडिपेंडेंस रेफरेंडम 2020’ नाम से एक बड़ी रैली की थी। एसजेएफ का कहना है कि उसका मकसद खालिस्तान की मांग को संयुक्त राष्ट्र तक ले जाना है।