हड़ताल और धरनों में भाग लेने से पहले लोगों के लिए ये सरकारी फरमान पढ़ लेना बहुत जरूरी है, कहीं ऐसा न हो कि पछताते रह जाएं आप। दरअसल, हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स के धरना-प्रदर्शन करने व हड़ताल में शामिल होने पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद अगर इन्होंने विभागीय आदेशों का उल्लंघन किया तो नौकरी से छुट्टी हो जाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु फुलिया ने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया है। निदेशक की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि जो भी आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स धरने-प्रदर्शन में भाग लेती हैं और हड़ताल करती हैं, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं। समेकित बाल विकास परियोजना विभाग की अहम योजना है। इसके अंतर्गत गर्भवती और प्रसूता महिलाओं, छह माह से छह साल तक के बच्चों को 300 दिन राशन उपलब्ध कराया जाता है।
विभाग की अन्य योजनाएं भी इन्हीं कर्मियावें के मार्फत अमल में लाई जा रही हैं। विभाग के देखने में आया है कि ये कर्मचारी योजनाओं को दरकिनार कर छोटी-छोटी मांगों के लिए धरने-प्रदर्शन और हड़ताल करती रहती हैं, जो उचित नहीं है। इससे विभाग की योजनाएं बाधित हो रही हैं, साथ ही जनता में संदेश भी गलत जा रहा है। इससे विभाग की छवि धूमिल होने के साथ ही योजनाओं पर विपरीत प्रभाव तो पड़ ही रहा है, आंगनबाड़ी केंद्रों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए इन कर्मियों की गतिविधियों पर रोक लगाना जरूरी है।
प्रथा पर रोक लगाना जरूरी
महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक रेणु एस फुलिया के अनुसार आंगनबाड़ी वर्कर्स और हेल्पर्स की इस प्रथा पर रोक लगाना जरूरी है। अगर भविष्य में ये आदेशों की अवहेलना करती हैं तो इनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से खत्म कर दी जाएं।