मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की महत्वाकांक्षी आदर्श स्कूल योजना पर संकट के बादल मंडराने के बाद सरकार ने नीति में तब्दीली कर दी है।
जिन सात स्कूलों को निजी हिस्सेदार छोड़ गए हैं, इनकी इमारत और मूलभूत ढांचे के निर्माण का अब पूरा खर्च पंजाब सरकार ने उठाने का फैसला किया है।
इससे पहले नीति के मुताबिक इमारत बनाने में आए कुल खर्च का 50 फीसदी हिस्सा निजी हिस्सेदार देते थे। नीति में बदलाव के बाद अब सरकार को सातों स्कूलों के लिए नए निजी हिस्सेदारों की तलाश है।
सूत्रों के अनुसार मोगा, मानसा, बठिंडा और फिरोजपुर जिलों में चल रहे सात स्कूलों के निजी हिस्सेदार चले जाने के कारण अब अस्थायी तौर पर इनका प्रबंध संबंधित एसडीएम को दिया है।
योजना में निजी हिस्सेदारों की कम हो रही दिलचस्पी के चलते मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाले पंजाब राज्य शिक्षा विकास बोर्ड ने यह फैसला किया है कि जिन स्कूलों के हिस्सेदार चले गए हैं, उनकी इमारतों का पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
गौरतलब है कि इन स्कूलों की इमारतें अभी अधूरी हैं। एक स्कूल की इमारत पर करीब 7.5 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
इनमें दो हजार गरीब छात्रों को मुफ्त शिक्षा दी जाएगी। स्कूलों की इमारतों और मूलभूत ढांचे पर तो सरकार और निजी हिस्सेदार का आधा-आधा खर्च होता था।
स्कूल का प्रबंधन निजी हिस्सेदार के पास था, लेकिन इसको चलाने के लिए 70 फीसदी हिस्सा सरकार का और 30 फीसदी निजी कंपनी का होता है।
सरकार ने प्रति बच्चा 1600 रुपये देने का एक अनुमानित मापदंड अपनाया हुआ है। मुख्यमंत्री ने 2007 में यह योजना शुरू करते हुए प्रत्येक ब्लाक में एक आदर्श स्कूल शुरू करने की घोषणा की थी। पंजाब में अभी कुल 24 आदर्श स्कूल चल रहे हैं।
किन स्कूलों के लिए हिस्सेदारों की तलाश
हरदासा------------जिला फिरोजपुर
दौलतपुर और रणशीहपुरा----जिला मोगा
बोहा और भोपाल------जिला मानसा
चाऊ के--------जिला बठिंडा
मल्लहा-----जिला फरीदकोट