लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार और विधानसभा चुनाव करीब देखकर हरियाणा सरकार के कामकाज में तेजी आ गई है। सबसे पहले कर्मचारियों के साथ हुई बातचीत के फैसले को अमलीजामा पहनाने का काम शुरू किया गया है।
मुख्य सचिव एससी चौधरी ने सोमवार को प्रशासनिक सचिवों के साथ इस बात की समीक्षा की कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में लिए फैसलों पर क्या स्थिति है।
हो सकता है मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी इस मसले पर दोबारा बैठक करें। मुख्य सचिव ने अफसरों के साथ बैठक करने के बाद मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एसएस ढिल्लों, उपप्रधान सचिव आरएस दून और वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजन गुप्ता के साथ अलग से बैठक की।
सीएम के साथ गत 26 फरवरी को कर्मचारियों की बैठक हुई थी जिसमें करीब डेढ़ दर्जन मांगों पर सहमति बनी थी। कर्मचारियों की एसीपी ग्रेड देने का फैसला तो उसी समय लागू हो गया था। लेकिन कुछ वेतन विसंगतियां दूर करने, श्रमिक नीति पूरी तरह लागू करने और कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के लिए रेगुलराइजेशन पालिसी तैयार करने के फैसले फिलहाल लंबित हैं।
सीएम के साथ बैठक में पंजाब की रेगुलराइजेशन पालिसी के अनुसार हरियाणा में तीन साल तक की सेवा वाले कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का फैसला हुआ था। मगर बैठक की कार्रवाई में उमा देवी के फैसले का भी जिक्र कर दिया गया। अब मुख्य सचिव ही स्पष्ट करेंगे कि कौन सी पालिसी लागू करनी है।
उधर, कर्मचारी तालमेल समिति के सदस्य और सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के महासचिव सुभाष लांबा ने बताया कि कर्मचारियों ने 24 मई तक का अल्टीमेटम सरकार को दे रखा है।
अल्टीमेटम के अनुसार जो मांगें मुख्यमंत्री ने बैठक में मानी थी, उन्हें 24 मई तक लागू कर दिया जाए अन्यथा कर्मचारी फिर आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।