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पंजाब सरकार का बड़ा फैसला : उद्योगों ने निकाला भूजल तो देना होगा शुल्क, पढ़ें किस पर पड़ेगा कितना भार

Mon, 16 Nov 2020 04:27 PM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला, चंडीगढ़
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पानी (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब में गिरते भूजल स्तर को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने की रूपरेखा तैयार कर ली है। राज्य में औद्योगिक और व्यापारिक उद्देश्य के लिए अब बिना अनुमति भूजल का उपयोग नहीं किया जा सकेगा और यदि अपरिहार्य कारणों से अनुमति दी भी जाएगी तो इसके लिए भारी भरकम फीस वसूलने की योजना बनाई गई है।
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हालांकि सरकार ने कृषि, पेयजल और घरेलू इस्तेमाल के लिए भूजल के उपयोग पर अपना रुख नरम रखा है और इसे योजना से बाहर रखा गया है। सरकार ने भूजल के दोहन के साथ-साथ पानी के संग्रहण को प्रोत्साहित करने की योजना भी तैयार की है।


पंजाब वाटर रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने पंजाब ग्राउंड वॉटर एक्सट्रेक्शन एंड कंजरवेशन गाइडलाइंस, 2020 के मसौदे के तहत औद्योगिक और व्यापारिक उद्देश्य के लिए भूजल निकालने पर लागू की जाने वाली फीस (आवेदन शुल्क, प्रोसेसिंग शुल्क, रजिस्ट्रेशन फीस, भूजल मुआवजा, कन्वींस चार्ज, कंजरवेशन क्रेडिट, नॉन-कम्पलाइंस चार्ज आदि) काफी ज्यादा रहेगी। 
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छोटे उद्योग, जो प्रतिदिन 10 क्यूबिक तक भूजल का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें शुल्क में रियायत मिलेगी। मसौदे के अनुसार, सूबे के आरेंज जोन में प्रतिदिन 10 क्यूबिक भूजल के लिए 8 रुपये, 10-100 क्यूबिक के लिए 18 रुपये और 100 क्यूबिक से अधिक के लिए 22 रुपये देने होंगे। येलो जोन में यह दरें क्रमश: 6, 14 और 18 रुपये तथा ग्रीन जोन में 4, 10 और 14 रुपये रहेंगी। 

इसके अलावा वाटर कंजरवेशन करने वालों को क्रमश: 4, 3 व 2 रुपये प्रति क्यूबिक की दर से फीस में छूट भी दी जाएगी। इनके अलावा बिल में अन्य सभी चार्जेस भी जोड़े जाएंगे। अथॉरिटी द्वारा संबंधित उद्योगों को भूजल दोहन की अनुमति केवल 3 साल के लिए दी जाएगी, जिसे बाद में रिन्यू कराना होगा।

भूजल दोहन पर अलग-अलग हैं दावे
जल स्त्रोत विभाग पंजाब और सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र चंडीगढ़ द्वारा सितंबर 2018 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में जमीनी पानी का दोहन 165 फीसदी तक पहुंच चुका है और इसके 138 ब्लाक में से 109 ब्लाक में भूजल का दोहन अत्यधिक मात्रा में हो रहा है। इनमें 2 ब्लाक में हालत अत्यधिक गंभीर और 5 ब्लाक में गंभीर हैं। सूबे के केवल 22 ब्लाक में ही स्थिति संतोषजनक कही जा सकती है। 

केंद्र सरकार की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण 103 ब्लाक डार्क जोन में आ चुके हैं, जहां भूजल का स्तर 73 फीसदी तक नीचे जा चुका है। इनमें 5 ब्लाक में स्थिति अत्यधिक गंभीर है, जबकि 4 ब्लाक तेजी से भूजल रहित होने की तरफ बढ़ रहे हैं। सूबे के 17 जिलों में भूजल दोहन सबसे अधिक हो रहा है। वहीं, पंजाब सरकार की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार, 44 इलाके आरेंज जोन (जहां 200 फीसदी से ज्यादा भूजल का दोहन हो चुका है) में, 65 इलाके येलो जोन (जहां 100-200 फीसदी तक दोहन हुआ है) में और 29 इलाके ग्रीन जोन (जहां 100 फीसदी से कम दोहन हुआ है) में आते हैं।
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