सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की अनदेखी के कारण एक प्रसूता ने अस्पताल के बाथरूम में कन्या को जन्म दिया। महिला के परिजनों द्वारा स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर पर शिकायत करने से डॉक्टरों ने प्रसूता और नवजात शिशु की देखरेख शुरू की। वहीं एसएमओ डॉ. प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि मामले की जांच जारी है और दोषी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार कैनाल कालोनी निवासी गर्भवती परमजीत कौर को प्रसव पीड़ा होने पर वीरवार सुबह 11 बजे सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। शाम 6 बजे महिला डॉक्टरों ने यह कहकर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी कि अभी डिलीवरी होने में काफी समय बाकी है। महिला के परिजन घर जाने के बजाय अस्पताल के प्रतीक्षालय में ही बैठे रहे। परमजीत को प्रसव पीड़ा महसूस हो रही थी।
रात करीब सवा 2 बजे परमजीत कौर प्रसव पीड़ा से चिल्लाने लगी तो उसके परिजनाें ने अस्पताल की डॉक्टरों को बुलाया। लेकिन किसी भी डॉक्टर या नर्स ने उसकी एक न सुनी। करीब 2 बजकर 36 मिनट पर जब प्रसूता बाथरूम में गई तो वहीं उसने एक बच्ची को जन्म दिया।
बिना डॉक्टरी सहायता के परमजीत कौर जमीन पर ही अचेत पड़ी रही जबकि उसके परिजनों ने बड़ी मुश्किल से बच्ची और उसे संभाला। बाद में स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नं. 104 पर इस मामले की शिकायत कर दी।
शिकायत करते ही डॉक्टरों में खलबली मच गई। इस बारे में महिला डॉक्टर सत्या ने बताया कि वे बच्चे की देखभाल कर रही थी। जबकि एसएमओ डॉ. प्रदीप अग्रवाल का कहना है कि मामले की शिकायत उनके पास आई है और जांच में जो भी डॉक्टर या नर्स दोषी पाई जाएगी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बारे में स्वास्थ्य मंत्री सुरजीत ज्याणी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वे पूरे मामले की रिपोर्ट मंगवाएंगे और दोषी महिला चिकित्सक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेंगे।