वहीं, दूसरे मामले में पाला सिंह, जसविंदर सिंह और हरनीत सिंह सभी निवासी गांव सुरल कलां तहसील राजपुरा जिला पटियाला ने शिकायत दी। इसमें उन्होंने बताया कि मिट्ठू राम राजपूत जाति से है लेकिन उसने अनुसूचित जाति का प्रमाणत्र बनवा रखा है। इस प्रमाणपत्र के आधार पर वह सुरल कलां का पंच चुना गया। शिकायतकर्ताओं ने मिट्ठू राम का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने और उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
डीसी पटियाला ने जांच की तो खुली पोल
विभाग ने इस मामले में डिप्टी कमिश्नर पटियाला से रिपोर्ट मांगी गई। इस मामले की जांच करने पर पता चला कि जसवीर सिंह पिछडी श्रेणी से है लेकिन वह बाहर से आकर यहां का निवासी बना है। सरकार के निर्देशानुसार वह पंजाब में पिछड़ी श्रेणी का लाभ नहीं ले सकता। इसके बाद जसवीर सिंह को पंजाब के स्थायी निवासी के रूप में जारी पिछड़ी श्रेणी का जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
मिट्ठू राम के मामले की जांच करने पर यह सामने आया कि वह अपने स्कूल रिकॉर्ड, नंबरदारों के बयान के अनुसार राजपूत जाति से है लेकिन उसने अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र बनवा रखा था। मिट्ठू राम को विजिलेंस सेल ने रिपोर्ट के लिए 22, 28 जून, 24 अगस्त और एक सितंबर को उपस्थित होने को कहा था। हालांकि वह उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद जिला सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता अधिकारी पटियाला की रिपोर्ट पर विचार करते हुए मिट्ठू राम का जाली जाति प्रमाणपत्र रद्द करने का निर्णय लिया गया है।