एयर होस्टेस सुसाइड केस के आरोपी हरियाणा के पूर्व गृह राज्यमंत्री गोपाल कांडा ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में सभी मंत्रियों के फोन कॉल टैप किए जा रहे हैं। मंत्री या विधायक की कोई पूछ नहीं है। मंत्री के कहने से भी कोई काम नहीं होता है। सभी शक्तियां मुख्यमंत्री के पास हैं।
गौरतलब है कि सिरसा के निर्दलीय विधायक गोपाल कांडा ने हरियाणा के भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। उन्होंने बुधवार को राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया से मुलाकात कर उन्हें समर्थन वापसी का पत्र सौंपा। कांडा ने खुद यहां पत्रकार सम्मेलन में इसकी घोषणा की। कांडा की समर्थन वापसी से सरकार को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
गोपाल ने राज्य सरकार पर लगाए आरोप
गोपाल कांडा ने आरोप लगाया कि पिछले दस साल के दौरान हरियाणा में कुछ नहीं हुआ है। अलबत्ता, 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हुड्डा से वादा किया था कि वे पांच साल तक उन्हें समर्थन देते रहेंगे। इसलिए वे अपने वादे पर कायम रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले दिन से ही उनके और सभी मंत्रियों के फोन टैप कर रही है। जब उनसे पूछा गया कि वे गृह राज्यमंत्री रहे हैं, तब भी फोन टैप होते रहे हैं? कांडा ने हां में जवाब दिया और कहा कि सभी के फोन टैप हो रहे हैं। विधायकों की भी कोई पूछ नहीं है।
सरकार की सोच विकास करने की नहीं
कांडा ने कहा कि सरकार की सोच विकास की नहीं है। इसलिए प्रदेश को एक विकल्प की तलाश है। अब लोग कांग्रेस, इनेलो, हजकां-भाजपा समेत अन्य सभी दलों के विकल्प के रूप में उनकी पार्टी तैयार है। इसकी घोषणा दो मई को गुड़गांव में की जाएगी।
वे नए लोगों और नई सोच के साथ हरियाणा के विधानसभा चुनाव में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि हरियाणा की जनता बदलाव चाहती है। वे अपनी पार्टी की सरकार बनाकर जनता के हित में काम करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य जयसिंह बिश्नोई भी उपस्थित थे। बिश्नोई ने बताया कि उन्होंने आयोग के सदस्य पद से बुधवार को इस्तीफा दे दिया है। वे विधिवत रूप से गोपाल कांडा की पार्टी में शामिल होंगे।
सरकार गिराने का आरोप अपने ऊपर नहीं लेना चाहता
कांडा ने कहा कि वे अपना समर्थन वापस ले रहे हैं ताकि उन पर कोई आरोप नहीं लगा सके कि उन्होंने हुड्डा सरकार गिरा दी। कांडा से जब पूछा गया कि उनके साथ कोई विधायक जुड़ने जा रहे हैं तो उन्होंने सीधा उत्तर न देते हुए कहा कि वे नए लोगों के साथ नए जोश से काम करेंगे।
लोकसभा चुनाव में किसे वोट दिलवाया है के सवाल पर कांडा ने कहा कि हो सकता है कि मुख्यमंत्री बीएस हुड्डा ने भी नरेंद्र मोदी को वोट दिया हो।
उन्होंने कहा कि उनके पिता ने 1952 में सिरसा से जनसंघ की टिकट पर चुनाव लड़ा था। उनके पिता ने आंदोलन में भाग लिया था।
सुसाइड नोट की नहीं हुई जांच
कांडा से जब सुसाइड नोट और सरकार से समर्थन वापस लेने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह एक मुख्यमंत्री की जिम्मेवारी थी कि उनके मंत्री के बारे में अगर कोई चिट्ठी (सुसाइड नोट) मिली हो तो पहले उसकी जांच करवाते। मगर सीएम ने जांच कराने की मांग नहीं की।
कांडा ने कहा कि हालांकि मामला अदालत में चल रहा है, मगर वे दावे के साथ कह सकते हैं कि दिल्ली पुलिस ने भी जांच के दौरान सुसाइड नोट की जांच नहीं की। उन्होंने कहा कि कई दिन पहले उनकी विनोद शर्मा से मुलाकात हुई थी।
कांडा ने सिरसा में एक धर्मशाला के शिलान्यास पर नाम न होने के मामले पर बोलते हुए कहा कि नाम लिखने का फैसला धर्मशाला वाले करते हैं। मगर उन्होंने उस दिन ही सरकारी गाड़ी छोड़ दी थी।