चंडीगढ़ में अब तक के सबसे बड़े वस्तु एवं सेवा कर की हेराफेरी के तार पड़ोसी राज्य हिमाचल, हरियाणा और पंजाब से भी जुड़ रहे हैं। यह खुलासा विभाग की ओर से जब्त दस्तावेजों की प्राथमिक जांच में हुआ है। अब टैक्स हेराफेरी की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। इस मामले से जुड़े राज्यों से भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
बता दें कि वस्तु एवं सेवाकर विभाग ने 24 जुलाई को मनीमाजरा में छापेमारी की थी। छापे में 6 ऐसी फर्में थीं, जिनके पते तो अलग-अलग थे, लेकिन इन्हें एक ही एजेंसी चला रही थी। इन एजेंसियों ने लगभग 61 करोड़ की बिक्री थी। हैरान करने वाली बात थी कि करोड़ों की बिक्री के बाद भी विभाग में एक रुपये टैक्स के नाम पर नहीं जमा कराया गया था।
छापेमारी के दौरान फर्म के कार्यालय से कुछ दस्तावेज और कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क जब्त की थी, जिनकी प्राथमिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कुछ लोग भी इस हेराफेरी में शामिल हैं। हालांकि, अभी विभाग इसकी जांच कर रहा है। अब विभाग ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। संबंधित राज्यों से भी टैक्स हेराफेरी को लेकर कुछ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
एजेंसी संचालक आपस में रिश्तेदार
टैक्स हेराफेरी में शामिल सभी छह एजेंसियों को एसआर एजेंसी की ओर से संचालित किया जा रहा था। इसका संचालन राजेश बहल की ओर से किया जा रहा था। अंबा एजेंसी की प्रोपराइटर ही पहचान मोनिका गर्ग के रूप में की गई है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह सभी आपस में रिश्तेदार हैं।
इन फर्मों में हुई थी छापेमारी
एसआर एजेंसी, शॉप नंबर-777, गोविंदपुरा, मनीमाजरा
ग्लोबल होम सॉल्युशन, शॉप नंबर 777/4, मनीमाजरा
रजत इंटरप्राइजेज, शॉप नंबर 765, ठाकुरद्वारा, मनीमाजरा
पॉलीटेक, यूरो सेल्स और अंबा एजेंसी, गोविंदपुरा, मनीमाजरा
चंडीगढ़ में अभी तक इतनी बड़ी टैक्स हेराफेरी नहीं हुई है। जांच में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरती जा रही है। जांच में कुछ तथ्य ऐसे सामने आए हैं, जिनके तार पड़ोसी राज्यों से भी जुड़े हैं।
- आरके चौधरी, सहायक आयुक्त, वस्तु एवं सेवाकर विभाग, चंडीगढ़