मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में करीब 10 हजार लोग रहते हैं, लेकिन यहां पर न तो एक भी डिस्पेंसरी है, न ही कोई मार्केट है। हजारों लोगों को बिना सुविधाएं दिए इन मकानों में शिफ्ट कर दिया गया है। यहां के पार्कों को कोई देखने वाला नहीं है। घास बड़ी-बड़ी हो गई है, जिसकी वजह से आए दिन सांप निकलने की घटनाएं सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने यहां करीब 5000 फ्लैट्स का निर्माण कराया है। पिछले साल जुलाई में कॉलोनी नंबर-4 से ढाई हजार परिवारों को मलोया के स्मॉल फ्लैट्स में शिफ्ट किया गया लेकिन अबतक मूलभूत सुविधाएं नहीं दी गई हैं। मलोया में वर्तमान में 10 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं शून्य है। लोगों को अगर बुखार या जुकाम भी होता है तो यहां उनकी जांच के लिए एक भी डिस्पेंसरी नही हैं।
प्रशासन ने लोगों को तो बसा दिया लेकिन उन्हें मार्केट की सुविधा भी नहीं दी। यहां वीटा और वेरका के बूथ तो बनाए गए हैं लेकिन अभी तक इन्हें अलॉट नहीं किया गया है। इलाके में जगह-जगह कूड़े के ढेर पड़े हैं। पार्क पूरी तरह से बदहाल स्थिति में हैं। सभी पार्कों में बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे सांप निकलने की घटनाएं सामने आ रही हैं। पिछले साल सांप के काटने से एक युवक की मौत भी हो गई थी। लोगों को यह मकान सौंपे अभी एक साल ही हुआ है लेकिन लीकेज की वजह से घरों में सीलन आनी शुरू हो गई है।
मलोया में कहीं धनास के स्मॉल फ्लैट्स जैसी स्थिति न बन जाए
मलोया में लोगों को शिफ्ट किए हुए अभी सिर्फ एक साल ही हुआ है लेकिन लोगों ने पार्क , गलियारों, खेल के मैदानों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। इसकी वजह से पूरे इलाके की सूरत बिगड़ रही है। फ्लैट्स की खूबसूरती भी तबाह हो रही है। लोगों ने घरों के आगे पेड़-पौधे लगाकर पूरी तरह से उस पर कब्जा कर लिया है।
अगर यही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मलोया की स्थिति धनास के स्मॉल फ्लैट्स जैसी हो जाएगी। यहां पर पानी की बर्बादी भी काफी होती है, जिसे लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है। इन सबके लिए लोगों के साथ प्रशासन के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। वहीं, मलोया के इस पूरे इलाके की बाउंड्री वॉल भी नही है, जिसकी वजह से साथ साथ लगते गांवों के पशु यहां घूमते रहते हैं।
मूलभूत सुविधाएं नहीं दी
यहां पर एक भी डिस्पेंसरी नही हैं। मामूली से बुखार के लिए भी काफी दूर जाना पड़ता है। हाउसिंग बोर्ड ने लोगों को यहां पर शिफ्ट तो कर दिया है लेकिन उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं दी। यहां पार्कों में घांसों की कटाई भी खुद ही करनी पड़ती है।
- भोला यादव, स्थानीय निवासी
साफ-सफाई सबसे बड़ी समस्या
यहां पर साफ-सफाई की बहुत समस्या है। जबसे लोगों को यहां पर शिफ्ट किया गया है, सफाई करने के लिए कोई नहीं आया है। कुछ कर्मी आते भी हैं तो वह मुख्य सड़कों की सफाई करके चले जाते हैं।
- राजा राम, स्थानीय निवासी
पार्कों का कोई रखरखाव नहीं है
पार्क में घास काफी बड़े हो गए हैं लेकिन उनकी छंटाई करने वाला कोई नहीं आता। बच्चों को पार्क में खेलने से भेजने में भी डर लगता है। अभी तक कईयों को सांप काट चुके हैं। डर लगा रहता है।
- राम प्रवेश, स्थानीय निवासी
किसी की कोई जवाबदेही नहीं
यहां पर साफ सफाई करने कोई नहीं आता। स्कूल के सामने सड़क को खोद दिया गया है, पिछले करीब 6 महीने से वह ऐसे ही पड़ा है। हर बार मिट्टी डाल दिया जाता है जो कुछ दिनों बाद निकल जाता है। किसी की कोई जवाबदेही नहीं है।
- सुखदेव, स्थानीय निवासी