सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देशभर में शुरू हुई लोक अदालतों का असर न्यायिक प्रणाली में दिखने लगा है। चंडीगढ़ जिला अदालत में 2011 से मार्च 2016 तक के आंकड़ों पर गौर करें तो सामने आया कि यूटी में तेजी से केस निपट रहे हैं। साथ ही केसों की पेंडेंसी कम हो रही है। वहीं पिछले पूरे साल में जितने केसों में फैसला आया, उसके मुकाबले इस साल अब तक केवल तीन माह में ही करीब 90 फीसदी केसों में फैसला हो चुका है।
नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के अनुसार पिछले साल 31 दिसंबर 2015 तक कुल 1 लाख 47 हजार 830 सिविल और आपराधिक केसों में फैसला आया। जबकि इस साल 31 मार्च तक ही 1 लाख 47 हजार 830 केसों में फैसला आ चुका है। वहीं वर्तमान में कुल 37 हजार 779 केस विचाराधीन हैं। इनमें 9 सेशन कोर्ट में कुल 5 हजार 636 और अन्य अदालतों में 32 हजार 143 केस विचाराधीन हैं।
2016 की वर्तमान स्थिति: जिला अदालत में 10 सेशन कोर्ट हैं। इनमें सीबीआई की विशेष अदालत को अलग कर दिया जाए तो 9 सेशन कोर्ट में 5 हजार 742 केस पिछले साल के हैं। जबकि इस साल अब तक 8 हजार 620 नए केस सेशन अदालतों में आ चुके हैं। वहीं सिविल जजों की अदालतों में सिविल और क्रिमिनल के 33 हजार 787 केस पिछले साल के हैं। जबकि 31 मार्च तक 1 लाख 45 हजार 460 केस नए आ चुके हैं।
इनमें सिविल और क्रिमिनल केस भी शामिल हैं। वहीं अब तक सेशन कोर्ट में 8 हजार 726 और सबओर्डिनेट कोर्ट में 1 लाख 47 हजार 104 केस सिविल और क्रिमिनल के निपट चुके हैं। वर्तमान में सेशन कोर्ट में 5 हजार 636 केस विचाराधीन हैं। इस आधार पर 9 सेशन जजों में से हर एक के पास औसतन 750 से 800 केस हैं। वहीं 20 सिविल जजों में से हर एक की कोर्ट में औसतन 1600 केस विचाराधीन हैं।
सीबीआई की विशेष अदालत में 53 केस: जिला अदालत स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में इस समय 53 केस चल रहे हैं। इनमें भ्रष्टाचार अधिनियम, क्रिमिनल केस, मर्डर, बैंक फ्रॉड शामिल हैं। वैसे सीजेएम कोर्ट में भी सीबीआई के कुछ केस चल रहे हैं। वहीं सीबीआई अदालत में सीजेएम कोर्ट से कोई आदेश आने के बाद उसमें कोई अपील और रिवीजन पिटीशन की भी सुनवाई होती है।
एसके अग्रवाल, डिस्ट्रिक एंड सेशन जज ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में तेजी से केसों का निपटारा हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए। वहीं लोक अदालतों ने केसों को निपटाने में काफी सहयोग किया है। इसके अलावा इनोवेटिव आइडिया और पारिवारिक विवाद, संपत्ति विवाद व तलाक के मामलों में समझौता कराने का काफी असर देखने को मिला है। इससे कई बार केस शुरुआत में ही समाप्त हो जाता है।