आर्थिक रूप से कमजोर तबके में अपने बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने के लिए इस बार पहले से ज्यादा उत्साह है। अभिभावकों ने स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से मूल्यांकन परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के पैटर्न को भी समझा है और उसी अनुसार तैयारी कराई है। इसे देखते हुए शिक्षा निदेशालय का मानना है कि इस बार मुफ्त शिक्षा के लिए दाखिला लेने वाले गरीब छात्रों की संख्या बढ़ेगी।
स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास का कहना है कि बीते वर्ष निजी स्कूलों में नियम-134 ए के तहत दूसरी से बारहवीं कक्षा तक 18 हजार बच्चों ने दाखिला लिया था। इस बर्ष यह संख्या 25 हजार तक पहुंचने की उम्मीद है, चूंकि पिछले वर्ष की तुलना अबकी बार आवेदन भी ज्यादा आए थे।
हरियाणा सरकार गरीब बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति निजी स्कूलों को बिल सौंपने पर ही करेगी। निजी स्कूलों को स्कूल शिक्षा विभाग ने चेता दिया है कि बिना बिल सौंपे एक भी रुपया प्रदान नहीं किया जाएगा।
स्कूल प्रबंधकों के पास अब भी समय है वे 30 अप्रैल तक उनके स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर चुके या कर रहे छात्रों का पूरा ब्योरा फीस राशि सहित शिक्षा निदेशालय में जमा कराएं, उन्हें राशि प्रदान कर दी जाएगी।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा-19 के अनुसार निजी स्कूलों को गरीब बच्चों को अन्य बच्चों की तरह सुविधाएं देनी होंगी। ऐसे बच्चों से कोई अन्य फीस स्कूल नहीं ले सकते हैं।
इनकी फीस की प्रतिपूर्ति के लिए संबंधित स्कूल को अलग बैंक खाता खोलना अनिवार्य है। स्कूल को वर्ष में दो बार बिल बनाकर फीस की प्रतिपूर्ति के लिए विभाग को आवेदन करना होगा।
विभाग बैंक खाते में प्रतिपूर्ति करेगा। स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पीके दास का कहना है कि फीस प्रतिपूर्ति के लिए स्कूल को ये शपथ पत्र देना होगा कि कितने छात्रों ने परीक्षा ग्रहण की है, कितनों ने परीक्षा दी, किसी छात्र ने स्कूल तो नहीं छोड़ा। विभाग के फीस प्रतिपूर्ति के लिए बार-बार पत्र जारी करने के बावजूद निजी स्कूल बिल प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं।
10 अप्रैल तक किसी भी निजी स्कूल ने फीस प्रतिपूर्ति के लिए अपना दावा नहीं किया है। ऐसे में विभाग उन्हें कैसे राशि प्रदान कर सकता है। निजी स्कूल छात्रों को दाखिले से नहीं रोक सकते हैं। वे बिल दें, विभाग समयबद्ध तरीके से प्रतिपूर्ति करेगा।