हरियाणा के नगर निकायों में सफाई कर्मचारी अब सीधे निकायों के अधीन ठेके पर भर्ती होंगे। ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर दी गई है। उन्हें न्यूनतम 8100 रुपये वेतन दिया जाएगा। यह फैसला मंगलवार को हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में किया गया।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बताया कि आउटसोर्सिंग नीति में छूट दी गई है। नगर निकायों में ठेकेदारों के जरिए रखे मौजूदा सफाई कर्मचारियों को संबंधित नगर निकाय में एक जुलाई, 2014 से कांट्रैक्ट पर रखा जाएगा। वे नगर निकाय में रोल पर हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह घोषणा उन्होंने गोहाना में की थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस समय 500 की आबादी पर एक सफाई कर्मचारी रखने का प्रावधान है। इसे घटाकर 400 कर दिया गया है। इससे नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों के अतिरिक्त पद सृजित होंगे।
नगर निकायों को अनुबंध आधार पर सीधे तैनात सफाई कर्मचारियों की संख्या, वास्तविक जरूरत और सफाई कर्मचारियों को वेतन की अदायगी करने के लिए संबंधित नगरपालिका की वित्तीय स्थिति के मद्देनजर सेवा नियमों के अनुसार सीधे भर्ती आधार पर नियुक्त करने की अनुमति लेने को भी कहा जाएगा।
सीएम ने घोषणा की कि नगर निकायों में सीवरमैन को 2000 रुपये महीना अतिरिक्त जोखिम भत्ता दिया जाएगा। सफाई कर्मचारियों को हर साल दो वर्दी और एक जोड़ी बूट दिया जाएगा। झाड़ू और अन्य जरूरी सामान भी नगर निकाय देगा।
13428 और सफाई कर्मचारियों की होगी जरूरत
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश के नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों को 8637 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 5942 पदों पर सफाई कर्मचारी नियमित हैं। इसके अलावा 10530 सफाई कर्मचारी ठेकेदारों के माध्यम से काम कर रहे हैं। अब 400 की आबादी पर एक सफाई कर्मचारी लगाने के फैसले के बाद 13428 अतिरिक्त पदों की जरूरत होगी।