कीमोथैरेपी के दौरान इस्तेमाल होने वाली एंटी कैंसर ड्रग बोटीजोमिब पर एमआरपी 12 हजार प्रिंट है, जबकि बाजार में यह दवा मात्र 1500 से तीन हजार में उपलब्ध है। पीजीआई के आसपास दुकानों में तो फिलहाल इस रेट पर दवा मिल जाती है, लेकिन जो मरीज प्राइवेट हास्पिटल में इलाज कराते हैं या किसी दूसरे शहर में उन्हें एमआरपी पर ही दवा मिलती है।
यानि जो दवा 1500 से तीन हजार में मिल जानी चाहिए थी, वह मरीजों को कई गुना महंगी मिलती है। इसी तरह से ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में उपयोग आने वाली दवा ट्रस्ट्यूज्यूमेब की 440 एमजी की डोज का एमआरपी 60 हजार है, लेकिन जब मरीज खरीदते हैं तो उन्हें यह दवा अलग-अलग ब्रांड की 20-30 हजार में मिलती है।
कीमोथैरेपी में इस्तेमाल की जाने वाली फिलग्रेस्टिम की एमआरपी 12 सौ से 1500 रुपये है, जबकि बाजार में इसका मूल्य 300 रुपये है। जब इतना अंतर होगा तो घपलेबाजी तो तय है।
अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा के मेडिकल सेल के प्रेसिडेंट प्रिंस भंढुला ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय दवा मूल्य नियात्मक (एनपीपीए) दफ्तर में पत्र भेजा। वहां से करीब दस दिन बाद जवाब आया कि इस संबंध में विचार चल रहा है।
जल्द ही कई दवाओं के रेट नियंत्रित किए जाएंगे। इस लेटर के करीब 20 दिन बाद सरकार ने 42 दवाओं के रेट नियंत्रित कर दिए हैं। इस संबंध में प्रिंस भंढुला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनपीपीए को धन्यवाद दिया है कि उन्होंने गरीब मरीजों की बात सुनी।
इन दवाओं की लिस्ट प्रकाशित की गई थी 23 जनवरी को
क्रमांक दवा एमआरपी बाजार में
1. पैक्लीटैक्सेल (260 एमजी) 9 हजार दो से ढाई हजार
2. डोकिटैक्सेल (120 एमजी) 12 हजार ढाई से तीन हजार
3. जेमीसेटाबाइन (एक ग्राम) छह हजार छह सौ से ढाई हजार
4. बोटीजोमिब (दो एमजी) 12 हजार 1500 से तीन हजार
5. ट्रस्ट्यूज्यूमेब (440 एमजी) 60 हजार 20-28 हजार
6. बीवेकिजूमेब (400एमजी) 40 हजार 20-25 हजार
7. पेगफिलग्रास्टिम -- 12-17 हजार दो से तीन हजार
8. फिलग्रास्टिम -- 12 से 1500 तीन सौ रुपये
9. कैप्सिटाबाइन -- 1250 रुपये 300 से 500 रुपये
10. जोलेड्रोनिक एसिड 2000-2800 600 रुपये
नोट : इनमें एक नंबर, चार नंबर, छह नंबर और सात नंबर वाली दवाइयों के रेट आठ मार्च से करीब 85 फीसदी तक कम हो जाएंगे।