हरियाणा स्वर्ण जयंती के मौके पर चंडीगढ़ जिला अदालत में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जज बहुत कुछ बोले। जस्टिस आदर्श गोयल कार्यक्रम में बतौर मुख्यातिथि पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि न्याय का आधार ट्रायल कोर्ट की प्रोसिडिंग से ही तय होता है। इसलिए ट्रायल कोर्ट्स पर सबसे अधिक जिम्मेदारी होती है।
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आज देश में ट्रायल कोर्ट्स में केसों की पेंडेंसी बहुत बढ़ रही है। इससे आम आदमी को परेशानी उठानी पड़ती है। इसलिए ट्रायल कोर्ट को तेजी से काम करने की जरूरत है। पंजाब यूनिवर्सिटी से एलएलबी करने के बाद 1974 में चंडीगढ़ से बतौर वकील अपना करियर शुरू करने वाले जस्टिस गोयल ने इस दौरान अपने अनुभव सांझा किए।
उन्होंने बताया कि उनके समय में वकीलों की फीस बहुत कम हुआ करती थी। वहीं अगर लोगों के पास पैसे नहीं भी होते थे तो वकील केवल उनसे कोर्ट फीस लेकर उनकी मदद करते थे। जस्टिस गोयल ने वकीलों से ऐसे लोगों की मदद करने की अपील की जिनके पास फीस चुकाने तक के पैसे नहीं होते। ताकि उन्हें भी न्याय मिल सके।
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20 साल से पेंडिंग पड़े केसों पर जताया अफसोस
गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन प्रोग्राम में सुप्रीम कोर्ट के जज
वहीं उन्होंने 20 साल से पुराने केसों के आज भी पेंडिंग होने पर अफसोस जताया। उन्होंने ट्रायल कोर्ट्स का प्रोसेस तेज करते हुए केसों की पेंडेंसी जल्द निपटाने का आह्वान किया।
इस मौके पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार और हाई कोर्ट जज जस्टिस एम जॉयपाल, जस्टिस महेश ग्रोवर, जस्टिस सूर्यकांत, सेशन जज बलबीर सिंह ने भी विचार व्यक्त किए।
इस मौके पर जिला अदालत के वकीलों और स्टाफ ने मिलकर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए। सबसे पहले कोर्ट कर्मचारी एमएस जंडियाला ने गुरुबाणी से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद महिला वकील अदिति श्योराण ने जिला अदालतों की प्रक्रिया और इतिहास पर आधार कविता पढ़ी।
गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन प्रोग्राम में सुप्रीम कोर्ट के जज
इस दौरान जिला अदालत पर आधारित 14 मिनट की डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई। मुख्य अतिथि और अन्य जजों ने पिछले 40 से 50 वर्ष से जिला अदालत में प्रैक्टिस कर रहे वकीलों को भी सम्मानित किया। साथ ही जिला अदालत की स्थापना के बाद से सराहनीय योगदान देने वाले रिटायर्ड और वर्तमान कर्मचारियों को भी सम्मानित किया।
इसके अलावा पिछले दिनों जिला बार एसोसिएशन और जिला अदालत के जजों के बीच खेले गए क्रिकेट मैच की विनर वकीलों की टीम को भी प्रतीक चिह्न भेंट किया गया। रंगारंग कार्यक्रम पेश करने वालों को भी प्रतीक चिह्न भेंट किए गए। इस मौके पर महिला वकीलों और कोर्ट की महिला कर्मचारियों ने गिद्दे की प्रस्तुति दी।
सम्मानित होने वाले वकील
बीएस भाटिया, आरके मित्तल, राज कुमार गोयल, वरिंदर ईशर, रामशरण दास, महावीर चौधरी, बीएस बराड़, एएस सुखीजा, हरीश गुप्ता।
सम्मानित होने वाले जिला अदालत के कर्मी
मनमोहन बहादुर, जगननाथ, ज्ञान चंद, राजेंद्र नाथ शर्मा, श्याम दास कथूरिया, अमर सिंह, मोहिंदर सिंह रांगी, स्व. अवतार सिंह, जोगिंदर सिंह, स्व. रमेश कुमार, स्व. सुनील शर्मा, रविंदर कौर, स्व. जसवंत सिंह, प्यार चंद डोगरा।