हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने राज्य सरकार के स्वर्ण जयंती समारोहों के खर्च पर आपत्ति की तलवार लटका दी है। खेमका ने फाइल पर साइन करने से इनकार करते हुए इस मामले में स्टेटमेंट आफ एक्सपेंडीचर मांग लिया है।
अधिकारियों से पूछ लिया है कि वे स्पष्ट करें कि किस मद में कितनी रकम खर्च की गई है।
अशोक खेमका के इन आदेशों के बाद जिलों के डीसी बगले झांक रहे हैं, क्योंकि सरकार ने प्रत्येक जिले को खर्च करने के लिए 54-54 लाख रुपये दिए थे, लेकिन उपायुक्तों ने एक से डेढ़ करोड़ तक के बिल सरकार को भेज दिए हैं। खेमका ने इस मामले में अधिकारियों और मंत्री से दो टूक कह दिया है कि 54 करोड़ की इस खर्चे संबंधी फाइल पर वह अपने हस्ताक्षर कैसे कर दें।
सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में खेमका ने यह भी मुद्दा उठाया कि स्वर्ण जयंती में कंसलटेंट नियुक्त करने की क्या आवश्यकता थी। 92 लाख की रकम कंसलटेंट को क्यों दी गई। यह बताया जाए कि कंसलटेंट ने कितना पैसा कहं खर्च किया। बताया जाता है कि उन्होंने अधिकारियों से यहां तक कह दिया है कि इस संदर्भ में मेरी आपत्ति को रिकार्ड कर लिया जाए तो मुझे कोई शिकवा नहीं होगा।
इसके अलावा ओपनिंग सेरेमनी के लिए 11 करोड़ और 4 करोड़ देने वाले जिलों से भी खर्च का ब्योरा मांगा है। हालांकि अधिकारियों ने तर्क दिया कि यह अवार्ड मनी है तो खेमका ने अवार्ड मनी का भी ब्योरा स्पष्ट करने को कह दिया। मालूम हो कि विपक्ष स्वर्ण जयंती समारोहों के खर्चों को लेकर पहले ही उंगली उठा चुका है।
जीएसटी का पक्का बिल बनेगा मुसीबत
अशोक खेमका
- फोटो : File Photo
यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मांगा
खेमका ने फाइल पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए सभी जिलों से यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट मांग लिया है। उन्होंने कहा है कि बिना प्रमाण पत्र दिखाए किसी के खर्च को अनुमति नहीं दी जाएगी। अब जिलों में बैठे उपायुक्तों के हाथ पैर फूल रहे हैं और वे अपने मातहत अधिकारियों को चंडीगढ़ सचिवालय के चक्कर कटवा रहे हैं।
जीएसटी का पक्का बिल बनेगा मुसीबत
इस पूरे मामले में खर्च का ब्योरा देने में अधिकारियों के सामने दिक्कत यह है कि पक्का बिल जीएसटी के साथ मिलेगा। बाकी बिना बिल के दिया गया खर्च स्वीकृत नहीं होगा। खेमका की इस मुहिम को खेल मंत्री अनिल विज का भी समर्थन मिल गया है।
यह है मामला
हरियाणा राज्य के गठन को 50 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश भर में स्वर्ण जयंती समारोह आयोजित किए गए थे। जिसके लिए नोडल विभाग खेल महकमे को बनाया गया था। इसका आगाज करनाल से हुआ था। वहां समारोह पर 4 करोड़ की राशि खर्च की गई और बाकी उपायुक्तों को 54-54 लाख की स्वीकृति दी गई। अब उपायुक्तों ने एक से डेढ़ करोड़ के बिल बनाकर भेज दिए हैं। उपायुक्तों ने कहा है कि कई लोगों का पैसा बकाया देना है, कृपया जारी करने का कष्ट करें।
मेरे संज्ञान में यह मामला है। खेमका जी ने जो कहा है, उचित है। बिना पक्का बिल दिए किसी को राशि नहीं जारी की जाएगी।
अनिल विज, खेल मंत्री, हरियाणा