इसके बाद उन्होंने घर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की तो पता चला कि सोने की ज्वैलरी सब्जियों के कचरे के साथ बाहर फेंक दी और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच में एक आधी पूंछ कटे सांड ने निगला हैं। इसके बाद परिजनों ने आधी पूंछ कटे होने की निशानी पर कई गलियों में सांड की तीन घंटे तलाश की।
शनिवार साढ़े तीन बजे आवारा सांड किसी गली में खुली जगह पर बैठा हुआ पाया गया। जिसके बाद आवारा सांड को इंजेक्शन लगाकर कड़ी मशक्कत के बाद घर के पास खाली प्लाट में लाकर बांधा गया और चिकित्सक के अनुसार सांड को हरा-चारा, गुड़, केले आदि खिलाकर गोबर के माध्यम से सोना निकलवाने के लिए काफी खातिरदारी की गई। लेकिन अभी तक सफलता न मिलने पर प्रयास जारी है।
पशु चिकित्सक फतेहचंद ने बताया कि पशु के मुंह से होते हुए खाना तीन जगह पर जाता है। जिस दौरान पहले उसके मुंह से गले में और फिर गले से पेट में और पेट से पशु फिर उगाला करके मुंह में खाना लाने के बाद गोबर के रास्ते से बाहर आता है। पहले विकल्प के तौर पर पशु को हरा-चारा आदि खिलाकर गोबर के माध्यम से सोना निकाला जा सकता है।
दूसरे विकल्प के तौर पर हिसार के पशु अस्पताल में जाकर पहले उसके पेट का एक्स-रे आदि करवाकर जांच करवा लो कि क्या उसके पेट में सोना है। यदि है तो ऑपरेशन के माध्यम से उसके पेट से सोना निकाला जा सकता है। लेकिन ऑपरेशन के बाद पशु की जान जाने का भी खतरा रहता है। जिस पर परिजनों ने बताया कि वह पहले विकल्प से ही सोने निकालने का प्रयास करेंगे। यदि फिर भी सोना नहीं निकलता तो वे दूसरे विकल्प का सहारा नहीं लेगें। क्योंकि वह नहीं चाहते कि सोने के लिए किसी पशु की जान जाए।