चंडीगढ़। घर में पड़ा पुराना मोबाइल, खराब कंप्यूटर या बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान अब सिर्फ कचरा नहीं, बल्कि सोना, चांदी, तांबा और पैलेडियम जैसी कीमती धातुओं का खजाना भी है। जरूरत है तो बस इन्हें निकालने की ऐसी तकनीक की, जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाए। इसी दिशा में सूक्ष्मजीवों और जैविक पदार्थों की मदद से ई-कचरे से धातुओं की रिकवरी की संभावनाएं सामने आई हैं। इससे कीमती संसाधनों को दोबारा इस्तेमाल में लाने और प्रदूषण का दबाव घटाने में मदद मिल सकती है।
सेक्टर-32 के जीजीडीएसडी कॉलेज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के डॉ. नवनीत बत्रा और डॉ. अभिनाशी सिंह सोढ़ी तथा पंजाब यूनिवर्सिटी के सोनू भाटिया ने इस विषय पर अध्ययन किया है। उनका शोध-अध्याय फ्यूचर प्रॉस्पेक्टिव ऑफ क्रिटिकल मेटल बायो रिकवरी: एडवांसिंग ग्रीन टेक्नोलॉजीज फॉर अ सर्कुलर एंड सस्टेनेबल फ्यूचर अगस्त 2026 में स्प्रिंगर नेचर की पुस्तक में प्रकाशित हुआ।