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चंडीगढ़ः मेमोग्राफी टेस्ट के लिए डेढ़ करोड़ की मशीन तो खरीद ली, पर स्टाफ को नहीं किया प्रशिक्षित

Wed, 05 Feb 2020 11:22 AM IST
खुशबू गोयल वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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चंडीगढ़ स्थित गवर्नमेंट मल्टी स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल- 16 में ब्रेस्ट कैंसर के डाइग्नोस्टिक के लिए डेढ़ करोड़ की हाइटेक मशीन खरीदी जा चुकी है, लेकिन ट्रेंड टेक्निकल स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। नतीजन जिस मशीन से पीजीआई में प्रतिदिन 30 से 40 मेमोग्राफी टेस्ट होते हैं, यहां महज तीन से चार टेस्ट हो रहे हैं।
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सुविधा उपलब्ध होते हुए उसका लाभ न मिलने से मरीजों को निजी सेंटरों में दोगुने से भी ज्यादा पैसे खर्च कर जांच कराना पड़ रहा है। ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए जीएमसीएच में मेमोग्राफी टेस्ट शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इसके  तहत 2019 में डेढ़ करोड़ की लागत से हाइटेक मेमोग्राफी मशीन की खरीद की गई।

अप्रैल 2019 में उसका ट्रायल कर जांच शुरू हुआ। मशीन इंस्टॉल हुए 10 महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उसे चलाने के  लिए एक भी टेकभनीकल स्टाफ को ट्रेनिंग नहीं दी गई है। ऐसी स्थिति में अस्पताल के  रेडियोलॉजिस्ट ही जीएमएसएच के साथ ही मनीमाजरा व सेक्टर 22 के हेल्थ सेंटर के एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड की रिपोर्टिंग से जुड़े काम पूरा करने के बाद बचे हुए समय में मेमोग्राफी टेस्ट कर रहे हैं।
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अस्पताल प्रशासन इस व्यवस्था को सुधारने का प्रयास कर रहा है, जिससे ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
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ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सचेत

ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते खतरे को देखते हुए 45 साल के  बाद मेमोग्राफी टेस्ट नियमित रूप से करानी चाहिए। इसके  साथ ही ब्रेस्ट में गांठ या स्किन मोटी होने, ब्रेस्ट और कंधे के नीचे की ओर दर्द या सूजन हो, ब्रेस्ट का आकार व रंग में बदलाव हो, रेशेज आए और गांठ महसूस हो तो मेमोग्राफी टेस्ट तत्काल कराएं।

मेमोग्राफी से आसान हुई डाइग्नोसिस
मौजूदा समय में मेमोग्राफी टेस्ट को ब्रेस्ट कैंसर के डाइग्नोसिस का सबसे सटीक और आसान तरीका माना जा रहा है। इसमें डाइग्नोस के  लिए कम रेंज वाली एक्स-रे का उपयोग किया जाता है। इसमें रिपोर्ट को डिजिटल रूप में भी देखा जा सकता है। ब्रेस्ट में बनी छोटी से छोटी गांठ का भी बहुत आसानी से सटीक पता चल जाता है।

मौजूदा समय में प्रतिदिन तीन से चार मेमोग्राफी की जा रही है। ट्रेंड टेकभनीकल स्टाफ न होने के कारण थोड़ी परेशानी हो रही है। टेकभनीकल स्टाफ का ट्रेनिंग प्रोग्राम तय कर दिया गया है। एक से डेढ़ महीने के  अंदर यह समस्या दूर हो जाएगी।
- डॉ. वीकेनागपाल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमएसएच
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