चंडीगढ़। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर-32 में डायरेक्टर का पद वर्ष 2016 से नियमित नियुक्ति न होने के कारण औपचारिक रूप से खत्म हो चुका है। लंबे समय से यह अहम पद अतिरिक्त प्रभार के सहारे चलाया जा रहा था जिसका असर कॉलेज की शैक्षणिक व्यवस्था से लेकर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं तक साफ नजर आया। अब जीएमसीएच प्रशासन ने कॉलेज और मरीजों के हितों को ध्यान में रखते हुए डायरेक्टर पद को दोबारा सृजित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। इस बार यह पद प्रिंसिपल के रूप में सृजित किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव को लेकर यूटी प्रशासन स्तर पर भी गंभीरता दिखाई जा रही है और गवर्नर की ओर से भी इसमें रुचि ली जा रही है। प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि पूर्णकालिक डायरेक्टर के अभाव में न तो शैक्षणिक फैसले समय पर हो पा रहे हैं और न ही अस्पताल प्रबंधन से जुड़े बड़े निर्णय प्रभावी ढंग से लागू हो सके। बताया गया है कि डायरेक्टर पद खाली रहने से नई मेडिकल सुविधाओं की योजना, स्टाफ की नियुक्ति, विभागों के विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई प्रोजेक्ट प्रभावित हुए। इसका सीधा असर ओपीडी, वार्ड और आपात सेवाओं पर पड़ा जिससे मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ा। वहीं कॉलेज स्तर पर पाठ्यक्रम विकास, शोध गतिविधियों और फैकल्टी से जुड़े अहम निर्णयों में भी लगातार देरी होती रही।
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि डायरेक्टर पद के पुनः सृजन से जीएमसीएच की अकादमिक मजबूती के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन में भी सुधार आएगा। अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही इस पद पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।