फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

GMCH 32 की इमरजेंसी वेंटीलेटर पर, एक शिफ्ट में एक डॉक्टर

Sun, 08 May 2016 10:33 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
जीएमसीएच-32 की मेडिसिन इमरजेंसी में मरीजों की हालत - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
चंडीगढ़ में सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हास्पिटल (जीएमसीएच) की मेडिसिन इमरजेंसी की हालत काफी पतली है। डॉक्टरों की संख्या में जबरदस्त कमी हो गई है। एक शिफ्ट में सिर्फ एक ही डाक्टर मौजूद रहते हैं, जबकि 100 से ज्यादा मरीज आते हैं। ऐसी स्थिति में डाक्टर भी परेशान हो जाते हैं।
विज्ञापन


काम ज्यादा होने के कारण डॉक्टर भी मानसिक तनाव में रहते हैं। मरीजों के सामने समस्या यह है कि उनका नंबर सात से आठ घंटे बाद आता है। इतनी देरी के बाद नंबर आने से मरीज भी खीज जाता है। इससे समझा जा सकता है कि उसे कितनी पीड़ा होती होगी। जीएमसीएच-32 के डॉक्टर मरीजों के इस दर्द को समझते हैं, लेकिन वे भी मजबूर हैं।

15 में से सिर्फ चार सीनियर रेजिडेंट
मेडिसिन डिपार्टमेंट में 15 सीनियर रेजिडेंट की पोस्ट है, लेकिन मौजूदा समय में सिर्फ चार रेजिडेंट तैनात हैं। जो एक-एक शिफ्ट में मौजूद रहते हैं। एक सुबह, दूसरा दोपहर, तीसरा रात की शिफ्ट और चौथा वैकल्पिक के तौर पर। हालांकि दूसरे डिपार्टमेंट में भी स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। वहां पर भी रेजिडेंट की कमी है, लेकिन ज्यादा परेशानी मेडिसिन इमरजेंसी की है। गर्मी बढ़ने के कारणइमरजेंसी में डायरिया, डीहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मरीज आ रहे हैं, इससे यहां भीड़ बढ़ गई है।
विज्ञापन


इसलिए नहीं टिकते मेडिसिन के डॉक्टर
बताया गया कि मेडिसिन डॉक्टर के न टिकने के तीन प्रमुख कारण हैं। पहला आजकल हर डाक्टर स्पेशलाइजल्ड फील्ड में जाना चाहता है। मसलन एमबीबीएस के बाद न्यूरो, इंडो, कार्डियो या अन्य डिपार्टमेंट में डिग्री हासिल करने चले जाते हैं। इसलिए वे नहीं टिकते। दूसरा कारण अनुभव है। सीनियर रेजिडेंट कुछ दिन तक इमरजेंसी में काम करते हैं और एक्सपीरियंस लेकर अपना काम शुरू कर देते हैं।

तीसरा सबसे अहम कारण काम का ज्यादा बोझ। काम का बोझ अधिक होने के कारण कोई भी डॉक्टर यहां टिकना नहीं चाहता। हरियाणा और पंजाब के हर जिले से मरीज जीएमसीएच-32 आ रहे हैं। एक शिफ्ट में करीब 100 मरीज होते हैं और एक ही डॉक्टर रहते हैं। ऐसे में सीनियर रेजिडेंट दूसरे हास्पिटल में ज्वाइन कर लेते हैं। इन सब कारणों से डॉक्टर यहां टिक नहीं रहे हैं, जो जीएमसीएच-32 के लिए परेशानी का कारण बन गए हैं।

मरीजों पर असर
डॉक्टर की कमी का सबसे ज्यादा असर पर मरीजों पर पड़ रहा है। इमरजेंसी में आने वाले पेशेंट गंभीर होते हैं। उसे विशेष देखभाल की जरूरत होती है, लेकिन डॉक्टर की संख्या कम होने के कारण मरीजों को यह सेवा भी नहीं मिल पाती है। मरीजों के परिजन काउंटर पर जाते हैं और डॉक्टरों की राह ताकते रहते हैं। गंभीर मरीजों को तवज्जो न मिलने के कारण कई की मौत भी हो जाती है या फिर वे जीएमसीएच-32 से चले जाते हैं।

सीनियर रेजिडेंट की संख्या तो कम है, लेकिन जितनी है, उतने में ही ज्यादा काम करने की कोशिश की जा रही है। डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही सीनियर रेजिडेंट आ जाएंगे।
विज्ञापन

- एके जनमेजा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसीएच-32
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें